मुफ्तीगंज। स्वच्छ भारत मिशन के तहत क्षेत्र के बनाए गए सामुदायिक शौचालयों में ताले लटक रहे हैं। इनके रखरखाव के नाम पर हर महीने हजारों रुपये खर्च किए जाते हैं लेकिन अफसरों को कोई परवाह नहीं है। जिलाधिकारी रविंद्र कुमार मांदड़ ने बंद शौचालयों को चालू करने का आदेश दिया था। इसके बाद भी हालात में कोई सुधार नहीं हुआ। ऐसे में लोग खुले में शौच जाने को मजबूर हैं। गांवों को स्वच्छ बनाने के लिए पूरे ब्लॉक में कुल 52 सामुदायिक शौचालयों का निर्माण कराया गया था। इनके संचालन की जिम्मेदारी स्वयं सहायता समूहों को दी गई है। देखभाग की जिम्मेदारी ग्राम प्रधानों की है। समूह के खाते में प्रतिमाह छह हजार रुपये मानदेय और शौचालय के रखरखाव व मरम्मत के लिए तीन हजार रुपये ग्राम प्रधान को मिलते हैं। इसके बावजूद ज्यादातर शौचालय निष्प्रयोज्य हो रहे हैं। किसी में दरवाजा टूटा है तो कहीं पानी की व्यवस्था नहीं है। कुछ शौचालयों में ताला बंद कर समूह की सदस्य गायब है। क्षेत्र के मुफ्तीगंज बाजार में 15 वर्ष पहले तत्कालीन ग्राम प्रधान साहब लाल यादव ने ग्राम पंचायत निधि से सामुदायिक शौचालय बनवाया था। देखरेख़ के अभाव में यह शौचालय खंडहर में तब्दील हो गया। प्रधान ने बताया कि बजट आने पर शौचालय की मरम्मत कराई जाएगी। बिझवार सारंग में बने सामुदायिक शौचालय के आसपास बड़ी-बड़ी झाड़ियां उग आई हैं। यहां कोई सुविधाएं नहीं हैं। अंदर जाने में भी लोग डरते हैं। इसी तरह सामुदायिक शौचालय सोसा पट्टी में लटका ताला लोगों को मुंह चिढ़ा रहा है।