पुरातत्व विभाग की ओर से शाही किले में कराए जा रही खुदाई में लखौरी ईंटों से निर्मित मोटी दीवार मिली है। 80 सेंटीमीटर मोटी लखौरी ईंट से बनी दीवार किले के अंदर से आने वाली एक दीवार से जुड़ी है। जानकारों का मानना है कि लखौरी ईंट का इस्तेमाल मुगल से लेकर ब्रिटिश काल तक होता रहा है। इस नाते यह किसी पुरानी सभ्यता का खुलासा नहीं कर सकता।
पुरातत्व विभाग ने शाही किले में नौ फरवरी से खुदाई शुरू कराई है। इसके माध्यम से जौनपुर के प्रारंभिक इतिहास को खंगालने की कोशिश की जा रही है। सारनाथ, वाराणसी स्थित पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) विभाग की टीम यहां कैंप कर रही है।
एएसआई के अधीक्षण पुरातत्वविद अजय श्रीवास्तव के निर्देशन में सहायक अधीक्षण पुरातत्वविद नीतेश सक्सेना, सर्वेयर अंबुज सिंह की देखरेख में खुदाई चल रही है। नितेश सक्सेना ने बताया कि खुदाई में 80 सेंटीमीटर मोटी लखौरी ईंट से बनी दीवार मिली है। यह दीवार शाही किले के मुख्य द्वार की दीवार के अंदर की ओर से आने वाली दीवार से लगी है।
19 दिन में करीब डेढ़ मीटर खुदाई की गई है।
उनका कहना है कि नेचुरल स्वायल मिलने तक खुदाई जारी रहेगी। उधर, खुदाई देखने के लिए भीड़ जुट रही है। जमीन के अंदर मिली लखौरी ईंट की मोटी दीवार को हर कोई कौतूहल से देख रहा है। पुरातत्व विभाग के लोग भले ही इसे कोई नई चीज नहीं मानते पर स्थानीय लोगों के लिए यह नई चीज है।