उसके बाद 20 दिसंबर 2016 को दिन के तीन बजे सूचना मिली कि प्रतिमा व प्रशांत के शव प्रशांत की हार्डवेयर की दुकान में पड़े हैं। इस संबंध में प्रतिमा के पिता ने मुकदमा दर्ज कराया। प्रशांत के पिता ने भी तहरीर दी थी।
इसमें आरोप लगाया गया कि नवीन, गोलू और कृपाशंकर ने दोनों की हत्या कर दी है। पुलिस ने विवेचना करके कोर्ट में केस डायरी दाखिल की। सरकारी वकील लाल बहादुर पाल ने कोर्ट में गवाहों को परीक्षित कराया। कोर्ट ने तीनों को दोषी पाते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई।