पुलिस ने कोर्ट में केस डायरी दाखिल की। शासकीय अधिवक्ता राजेश उपाध्याय, वीरेंद्र मौर्य व कमलेश राय ने गवाहों को परीक्षित कराया। विरल से विरलतम बताते हुए मृत्युदंड से दंडित किए जाने पर बल दिया। कोर्ट ने आरोपी को दोषी पाते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई ।
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अपर सत्र न्यायाधीश प्रथम अरविंद कुमार श्रीवास्तव ने शाहगंज थाना क्षेत्र के एक स्कूल की शिक्षिका से दुराचार करने एवं आत्महत्या के लिए दुष्प्रेरित करने के मामले में स्कूल डायरेक्टर को दोषमुक्त कर दिया। तत्कालीन प्रभारी निरीक्षक शाहगंज पूर्णमासी कन्नौजिया ने 26 जनवरी 2011 को शाहगंज थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई थी।
इसके मुताबिक. शिक्षिका के सुसाइड नोट में अंकित विवरण में पाया गया कि वह विधवा थी। स्कूल के डायरेक्टर आरोपी रणधीर ठाकुर से उसकी प्रगाढ़ता थी। शादी का झूठा आश्वासन देकर आरोपी ने शिक्षिका के साथ संबंध बनाया। कुछ समय बाद आरोपी उसे और उसके पुत्र को जान से मारने की धमकी देने लगा, जिससे तंग आकर 26 जनवरी 2011 को आरोपी के आवास के सामने खुद अपने शरीर पर पेट्रोल डालकर आत्महत्या कर ली थी।
पुलिस ने कोर्ट में केस डायरी दाखिल की। अभियोजन पक्ष से शासकीय अधिवक्ता अनूप शुक्ला तथा बचाव पक्ष से पंकज कुमार श्रीवास्तव ने मामले की पैरवी की। कोर्ट में मृत्यु पूर्व बयान और अन्य साक्ष्य संदेहास्पद साबित हुआ। घटना के समय आरोपी मौके पर नहीं था।
आरोपी का भाई ही शिक्षिका को चिकित्सक के पास ले गया था। कोर्ट में यह भी साबित नहीं हुआ कि आरोपी ने मृतका को आत्महत्या के लिए दुष्प्रेरित किया था। अन्य तथ्य भी कोर्ट में साबित नहीं हो पाया। कोर्ट ने साक्ष्य के अभाव में आरोपी को दोषमुक्त कर दिया।