जौनपुर। घनी आबादी के बीच पटाखों से हुए हादसों के बाद कुछ दिनों तक पुलिस भले ही सक्रियता दिखाती है लेकिन समय बीतने के साथ सबकुछ फिर से पुराने ढर्रे पर ही चलने लगता है। शहर समेत जिले के कई अन्य इलाकों में पटाखा विस्फोट की कई घटनाएं हुई हैं लेकिन कभी भी किसी घटना से सबक लेने की कोशिश नहीं की गई। नतीजतन आज भी आबादी के बीच पटाखों का गोदाम चल रहा है। दीपावली का पर्व करीब आते ही पटाखा कारोबारी अभी से माल डंप करने लगे हैं। आबादी के बीच बनाए गए इन पटाखा गोदामों में कभी कोई हादसा हुआ तो स्थिति भयावह हो सकती है लेकिन जिम्मेदारों को अभी संभावित हादसों की फिक्र नहीं है।
जिले में पटाखा विस्फोट से हुई प्रमुख घटनाओं के आकड़ों पर गौर करें तो आठ जुलाई 2008 को शहर कोतवाली क्षेत्र के ओलंदगंज उमरपुर मोहल्ले में पटाखा गोदाम में हुए विस्फोट अभीतक की सबसे बड़ी घटना है। विस्फोट से दो मंजिला मकान ढह गया था। पटाखा कारोबारी राजेश विश्वकर्मा समेत उनके परिवार के सभी आठ सदस्यों की मौत हो गई थी। उस परिवार में एक भी सदस्य जिंदा नहीं बच सका था। इतने बड़े हादसे के बाद भी प्रशासन ने सुरक्षा उपायों पर अमल नहीं कराया। एक साल बाद 16 नवंबर 2009 को मडिय़ाहूं कोतवाली क्षेत्र के मिरदहा मोहल्ले में पटाखा बनाते समय विस्फोट हो गया था। इस घटना में लाल मोहम्मद उर्फ लल्ला, हारुन, एहसान की मौके पर ही मौत हो गई थी। मछलीशहर कोतवाली के सादीगंज दक्षिणी मोहल्ले में कूड़े के ढेर में 19 अप्रैल 2015 को विस्फोट हो गया। इसमें तीन बच्चों की मौत हो गई थी। 14 मई 2017 में फिर हादसा हुआ। जहां शहर कोतवाली के कटघरा मोहल्ले में पटाखा रखे घर में अचानक विस्फोट हो गया। हादसे में नन्हकी (23) की मौत हो गई, जबकि नौसाबा (48) ने एक माह बाद उपचार के दौरान दम तोड़ दिया। 15 दिसंबर 2017 को बक्शा थाना क्षेत्र के बेलापुर गांव में पटाखों के गोदाम में विस्फोट हो गया। इससे आरिफ (12) और उसके बड़े भाई आशिक (22) की मौत हो गई थी।
शीघ्र ही जिले के सभी लाइसेंसधारकों के यहां अभियान चलाकर जांच की जाएगी। अगर कोई नियम के खिलाफ, सुरक्षा मानकों को पूरा किए बिना ही पटाखा रखा होगा तो संबंधित के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
डॉ संजय कुमार
एएसपी सिटी