भूमि अधिग्रहण के लिए पांच साल पुराने सर्किल रेट से मुआवजा देने का नोटिस मिलते ही किसानों में गुस्सा भर गया है। प्रशासन के रवैये से खफा केराकत और डोभी ब्लाक के तकरीबन 20 गांवों के सैकड़ों किसानों ने रविवार को डोभी ब्लाक मुख्यालय पर पंचायत कर अपना फैसला सुनाया।
किसानों ने कहा कि नए सर्किल रेट से उन्हें मुआवजा नहीं दिया जाएगा तो वे फोरलेन के लिए जमीन नहीं देंगे। भले ही उसके लिए उन्हें कोई भी कुर्बानी देनी पड़े। न मानेंगे न मारेंगे, अपना हक मनवाएंगे के नारे के साथ पंचायत खत्म हुई।
इंडो-नेपाल बार्डर-वाराणसी राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 233 को फोरलेन बनाने के लिए केराकत और डोभी ब्लाक के तकरीबन 20 गांवों की तकरीबन 74.2391 हेक्टेयर भूमि अधिग्रहण की कार्यवाही चल रही है। इसके लिए इलाके के दो सौ से अधिक किसानों की भूमि ली जा रही है।
10 गांवों के किसानों को नोटिस दिया गया तो पता चला कि उन्हें वर्ष 2011 के सर्किल रेट से मुआवजा दिया जाएगा। किसानों का कहना है कि उनकी भूमि 2016 में ली जा रही है और मुआवजा पांच साल पुराने रेट पर दिया जा रहा है। इससे 10 गुना से भी अधिक की क्षति हो रही है। यह सरासर अन्याय है।
ब्लाक प्रमुख शिवशंकर यादव की अध्यक्षता में ब्लाक मुख्यालय सभागार में हुई पंचायत में किसान न्याय मोर्चा उत्तर प्रदेश के प्रवक्ता विजय शंकर पांडेय ने कहा कि कानूनन किसी भी किसान को तब तक विस्थापित नहीं किया जाना चाहिए जब तक उसका पुनर्वास निश्चित न हो जाए।
लेकिन यहां प्रशासन मनमानी कर रहा है। उन्होंने कहा कि यदि आगरा बलिया एक्सप्रेस वे के लिए छह महीने के भीतर बातचीत कर सड़क बनवाने का कार्य किया जा सकता है तो जौनपुर के किसानों के गले पर तलवार क्यूं लटकाई जा रही है।
कौमी एकता दल के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष अतहर जमाल लारी, माकपा के प्रदेश सचिव हीरालाल यादव, सपा नेता हरी सिंह, पूर्व विधानपरिषद सदस्य अरविंद सिंह, किसान वंशनारायण पांडेय, महेंद्र निषाद, इंद्रजीत सिंह, हनुमान यादव, दुर्गेश सिंह, बीरबल, राजेंद्र प्रसाद सिंह, सुनील सिंह, योगेंद्र दीक्षित, रामवृक्ष सिंंह, हरी सिंह ने भी पंचायत को संबोधित किया। संचालन रामेश्वर सिंह ने किया। अरविंद पांडेय ने आभार व्यक्त किया।