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Jaunpur News: पेट्रोल पंपों पर सुविधाओं का अभाव, कागज पर सब ठीक

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पेट्रोल पंपों पर ग्राहकों की सुविधाओं की अनदेखी की जा रही है, वहीं कागज पर सब ठीक देखने को मिलता है। शहर से लेकर ग्रामीणांचल के ज्यादातर पेट्रोल पंपों पर मिलने वाली सुविधाओं में हवा व पेयजल की व्यवस्था नहीं है। वहीं कही शौचालय नहीं है तो कुछ जगहों पर काफी अंदर बनाया गया है, जिससे ग्राहक न प्रयोग कर सके। साथ ही यह पंप संचालक ग्राहकों के साथ घटतौली व मिलावट भी करने से बाज नहीं आते हैं। आयल कंपनी के अधिकारियों की मौजूदगी में रोस्टर के हिसाब से प्रत्येक माह में 10 से 15 पेट्रोल पंपों की जांच भी जाती है, फिर पंपों की ऐसी हालत कई सवाल खड़े कर रहे है।
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जिले में 235 पेट्रोल पंपों पर उपभोक्ताओं को मिलने वाली सुविधाएं पूरी तरह से नदारद हैं। इस दिशा में पेट्रोल पंप संचालक कोई गंभीरता से सकारात्मक कदम नहीं उठा रहे हैं। मानकों के मुताबिक पेट्रोल पंप पर वाहन को मुफ्त में हवा जांच और भरवाने की सुविधा उपभोक्ता को दी जाती है। हवा की सुविधा है तो कर्मचारी स्वेच्छा के नाम पर पैसे मांगने से नहीं हिचकिचाते। बावजूद जिले के पेट्रोल पंपों पर उपभोक्ताओं के लिए सुविधा पूरी तरह से बंद हैं। तमाम पेट्रोल पंपों पर तो कंप्रेशर और हवा भरवाने की सुविधा के लिए उपकरण तक नहीं हैं। इतना ही नहीं, पेट्रोल पंप पर उपभोक्ताओं को न तो पीने का पानी नसीब होता है और न ही सुविधाओं के नाम पर शौचालय बने हैं। साथ ही जहां शौचालय बने हैं, उनमें गंदगी की भरमार उपभोक्ताओं की मुसीबत बनती है।

इनकी भी होती है अनदेखी ...
पेट्रोल पंपों पर उपभोक्ताओं की सुविधाओं के लिए बड़े अंकों में प्रतिदिन के पेट्रोल व डीजल के रेटों को प्रदर्शित किया जाना चाहिए। कुछ पेट्रोल पंपों को छोड़ दिया जाए तो बाकी के पेट्रोल पंपों पर यह रेट केवल मशीन पर ही दिखाई देता है। साथ ही उपभोक्ता सुरक्षा के लिए फर्स्ट एड बॉक्स और अग्निशमन सुविधाएं भी बेमानी हैं। पेट्रोल पंपों पर न तो बाल्टियों में बालू दिखती हैं और न ही अग्निशमन यंत्र। साथ ही दुर्घटना की स्थिति में प्राथमिक उपचार की व्यवस्था भी मुहैया नहीं हो पाती।
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वर्जन ...
पानी व हवा का अभाव हो सकता है। इन सुविधाओं से पेट्रोल पंपों की ही आमदनी बढ़ती है। निरीक्षण में शौचालय न हो हम मान ही नहीं सकते, हो सकता है कही पीछे हो, जिससे ग्राहकों को न दिखता हो। इंडियन आयल कंपनी के अधिकारियों के साथ ही महीने में आपूर्ति विभाग, बाट-माप विभाग की टीम करीब 10 से 15 पंपों का निरीक्षण करती है, इसमें हम सिर्फ घटतौली, मिलावट चेक करते है। सुविधाओं की कमियों पर जुर्माना लगाया जाता है।
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संतोष विक्रम शाही, डीएसओ।
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