जलालपुर के तालमझवारा में कथा कहते निलेश महाराज वेंकटेश। संवाद
- फोटो : अमेठी- मुंशीगंज मार्ग से कोहरे के बीच गुजरता स्कूली वाहन।
केराकत। अमहित कृषि विज्ञान केंद्र की कार्यप्रणाली में खामियाें की भरमार है। इसका किसानों पर पड़ रहा है। केंद्र की पड़ताल में बुधवार को प्रभारी अधिकारी, वैज्ञानिकों और कर्मचारियों के कमरों में ताले लटकते मिले। एक कक्ष का दरवाजा खुला होने के बावजूद कुर्सी खाली थी। सुबह 10:30 संवाददाता पहुंचा तो कीर्ति सिंह स्मृति सभागार में केवल सफाईकर्मी ऊषा देवी साफ-सफाई करते मिलीं। संस्थान के वैज्ञानिक और कर्मचारी 11:30 बजे तक अनुपस्थित रहे। निरीक्षण के दौरान स्पष्ट हुआ कि गजेंद्र सिंह वैज्ञानिक, फसल सुरक्षा, अमित कुमार सिंह पशुपालन, दिनेश कुमार मृदा विज्ञान, विनोद सिंह उद्यान, डॉ. आरके सिंह (प्रभारी अधिकारी), सचिन यादव (कार्यक्रम सहायक) और धीरज कुमार आशुलिपिक सहित सभी के कक्षों में ताले लटके रहे। सुबह 10:40 बजे कुक रंजना कार्यालय पहुंचीं। केंद्र पर काम के सिलसिले में पहुंचे किसान निराश दिखे। सरकी गांव के किसान बीरू सिंह ने बताया कि वह बकरी पालन की जानकारी लेने आए थे लेकिन 11 बजे तक केवीके में कोई वैज्ञानिक मौजूद नहीं था। डोमपुर के श्यामू यादव ने बताया कि उनकी एक बीघा गेहूं की फसल पीली पड़ गई है। दवा और खाद की जानकारी लेने आए थे, मगर मार्गदर्शन नहीं मिला। सरकी के संतोष लहरी मछली पालन और केसीसी की जानकारी के लिए पहुंचे थे, जबकि सुल्तानपुर गांव के झबलू यादव ने सरसों की फसल में रोग से बचाव की जानकारी लेने की बात कही लेकिन सभी को बिना जानकारी लौटना पड़ा। केवीके के डायरेक्टर नरेंद्र देव सिंह ने कहा कि सुबह 10 बजे से शाम पांच बजे तक सभी वैज्ञानिकों और कर्मचारियों का अपने-अपने कार्यालयों में उपस्थित रहना अनिवार्य है। यदि कोई समय पर नहीं पहुंचता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। वहीं केंद्र प्रभारी अधिकारी डॉ. आरके सिंह ने बताया कि वे भांजे की शादी में जा रहे हैं। जो कर्मचारी अब तक नहीं पहुंचे हैं, उनकी ड्यूटी किसी ब्लॉक में लगी हो सकती है। केंद्र में लगातार हो रही अनुपस्थिति से किसानों को मिलने वाली तकनीकी सेवाएं प्रभावित हो रही हैं।