जौनपुर। अब गठिया बुढ़ापे की बीमारी नहीं रही। कम उम्र के लोगों को भी गठिया घेर रही है। 50 की उम्र में ही घुटने खराब हो रहे है। वक्त रहते ही बचाव करना चाहिए। ये बातें लायन्स क्लब और एसएएस केयर इंडिया के संयुक्त तत्वावधान में आर्थराइटिस गठिया जोडों के दर्द और उसके समाधान विषय पर कार्यशाला में बताई गई।
सिविल लाइन स्थित एक होटल में हुई कार्यशाला में मुख्य अतिथि आर्थोपेडिक सर्जन डॉ. उत्तम सिंह ने आर्थराइटिस के कारण, लक्षण, बचाव , आधुनिक उपचार और जीवनशैली से जुड़ी जानकारी दी। सीनियर सिटीजन्स में घुटने, कूल्हे और पीठ दर्द की समस्या सबसे ज्यादा कॉमन है। करीब 90 से 95 फीसदी मामलों में सही ट्रीटमेंट मिल जाए, तो ट्रांसप्लांट की नौबत से बचा जा सकता है। गलत लाइफस्टाइल, प्रोसेस्ड फूड, जंक फूड का सेवन और पोषण की कमी से मिडिल और वृद्धावस्था में जोड़ों की समस्या तेजी से बढ़ रही है।
अगर आर्थराइटिस ग्रेड 4 में पहुंच जाए, तो घुटने का रिप्लेसमेंट जरूरी हो जाता है। 50 की उम्र के बाद हड्डी रोग विशेषज्ञ से समय-समय पर मिलकर जांच करानी चाहिए। हड्डियों को मजबूत बनाए रखने के लिए कैल्शियम और अन्य पोषक तत्वों से भरपूर डाइट लेनी चाहिए। इस मौके पर प्रतिमा गुप्ता, राजेश राज गुप्ता, डॉ. राजेश मौर्य, डॉ. सूरज जायसवाल, अविनाश मिश्रा, डॉ. उत्तम सिंह, अंशुमान पाण्डेय, मनीष गुप्ता, योगेश साहू, नवीन मिश्रा, सुनीता सिंह, ज्योति श्रीवास्तव, शशिकांत सिंह उपस्थित रहे। संचालन मो. मुस्तफा ने किया।
मोटापा को नियंत्रित करें
शरीर का वज़न बढ़ने का सबसे ज्यादा असर जोड़ों पर पड़ता है। अधिक भार पड़ने की वजह से जोड़ समय से पहले खराब होने लगते हैं। नियमित व्यायाम एवं जांच की मांसपेशियों की कसरत, फिजियोथेरेपी, नियमित योग आदि करें। खुद को एक्टिव रखना चाहिए। अगर किसी तरह की समस्या हो, तो डॉक्टर से मिलें। सावधानी बरतने से हड्डियों की परेशानियों से बचा जा सकता है। जोड़ों की सूजन और दर्द का मुख्य कारण है, जो कार्टिलेज (उपास्थि) को घिसने से शुरू होता है।