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चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहा था किशन

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जौनपुर। पुलिस हिरासत में दम तोड़ने वाला कृष्णा उर्फ किशन इस बार पंचायत चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहा था। गांव का प्रधान बनने के लिए वह महीनों से अनुकूल माहौल बनाने में जुटा था। ग्रामीणों की हर जरूरत पर खड़ा रहने के साथ ही वह उनके लिए विभिन्न नेताओं-अफसरों से पैरवी भी करता था। उसकी बढ़ती सक्रियता के बाद अचानक से लूट के मामले में गिरफ्तारी और फिर हिरासत में मौत से ग्रामीण सन्न हैं। चुनाव से ठीक पहले हुई घटना के बाद हर कोई इसे गंवई सियासत से जोड़कर चर्चा करता रहा।
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तिलकधारी यादव के तीन पुत्रों में किशन दूसरे नंबर पर था। बड़ा भाई अजय घर पर ही रहता है। वहीं सबसे छोटा प्रदीप अपने पिता के साथ मुंबई में रहकर रोजगार करता है। किशन को छोड़कर अन्य दोनों भाइयों की शादी भी हो चुकी है। ग्रामीणों के मुताबिक किशन का स्वभाव शुरू से ही अलग रहा। उसकी राजनीति में रुचि रही। एक वर्ष पूर्व उसकी शादी के लिए रिश्ता भी आया, लेकिन उसने पहले राजनीतिक कॅरियर बनाने का हवाला देते हुए इंकार कर दिया था। इसके बाद घरवालों ने छोटे भाई की शादी कर दी। बड़ा भाई हत्या के प्रयास के मामले में कुछ माह पहले ही जेल से छूट कर लौटा था। पिता और छोटे भाई मुंबई में रहते हैं। लिहाजा घर पर खेती-बाड़ी का काम किशन ही संभालता था। इस बार वह प्रधानी का चुनाव लड़ने के लिए उत्साहित था। इसके लिए महीनों से वह तैयारी में जुटा था। गांव के लोगों से संपर्क बढ़ाने और उनकी जरुरत में खड़ा रहने के लिए वह तत्पर रहता था। ग्रामीणों के मुताबिक किशन का नाम पहले किसी आपराधिक मामले में शामिल नहीं आया था। अब अचानक से उसे लूट के मामले में शामिल बताए जाने से वह हतप्रभ थे।
अस्पताल में शव छोड़कर चली गई पुलिस, घरवालों को नहीं दी सूचना
जौनपुर। लूट के मामले में किशन को हिरासत में लेने के बाद बृहस्पतिवार की रात पुलिस दो बार उसके घर गई थी। हर बार घरवालों से यही कहा गया कि सिर्फ पूछताछ के लिए थाने ले जाया गया है, सुबह तक उसे छोड़ दिया जाएगा। घरवाले इंतजार कर रहे थे कि बेटा जल्द घर आ जाएगा, लेकिन जब अस्पताल पहुंचने पर उन्हें मौत की खबर मिली तो वह सन्न रह गए। घरवालों का आरोप है कि पुलिस अस्पताल में शव छोड़कर चली गई। उन्हें न तो किशन के बीमारी की जानकारी दी गई और न ही मौत की। अगर तबीयत ही बिगड़ी थी तो रात में उन्हें क्यों नहीं बताया गया।
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शाम करीब साढ़े 4 बजे से ही पुलिस की हिरासत में रहे किशन की तबीयत डेढ़ बजे रात को बिगड़ी। पुलिस के मुताबिक पहले उसे नौपेड़वा सीएचसी ले जाया गया। प्राथमिक उपचार के बाद सीधे जिला अस्पताल पहुंचाया गया। यहां मौत की जानकारी हुई तो पुलिसकर्मी अस्पताल से खिसक गए। हालांकि कुछ देर बाद ही अचानक से भारी फोर्स ने पूरे अस्पताल परिसर को अपनी निगरानी में ले लिया। शहर कोतवाली, लाइन बाजार, जफराबाद और सरायख्वाजा थाने की पुलिस के अलावा पीएसी और क्यूआरटी की टीम लगाई गई थी। खुद एएसपी और सीओ मौके पर डटे रहे। उधर, बक्शा थाने में भी सुबह से ही कड़ा पहरा रहा। किसी को भी वहां अंदर जाने की इजाजत नहीं थी। मृतक के बड़े भाई अजय का कहना है कि रात में पुलिस किशन को घर से ले गई तो सुबह तक छोड़ने की बात कही थी। सुबह होते ही जब थाने पहुंचा तो वहां भारी फोर्स थी। पहले एसटीएफ द्वारा उठाने की बात कही गई फिर बताया गया कि किशन की तबीयत खराब होने पर जिला अस्पताल ले जाया गया है। जब वह जिला अस्पताल पहुंचे तो किशन के मौत की खबर मिली। काफी हो-हुज्जत के बाद पुलिस ने घरवालों को किशन के शव तक जाने की अनुमति दी। अजय के मुताबिक किशन की पुलिस हिरासत में बर्बरता पूर्वक पिटाई की गई है। उसके शरीर के कई हिस्सों में इसके निशान हैं।
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