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पोस्ट कोविड के मरीजों के इलाज के नाम पर खानापूर्ति

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कोरोना संक्रमण से ठीक होने के बाद भी लोगों को तमाम तरह की दिक्कतें पैदा हो रही हैं। कोई तनाव का शिकार हो गया है तो किसी की नींद हराम हो गई है। किसी को दूसरी बीमारी होने का खतरा सता रहा है। ऐसे लोगों की काउंसिलिंग कर उनका इलाज करने की जरूरत है। इस बीच पोस्ट कोविड के नाम पर केवल खानापूर्ति की जा रही है। मरीजों का इलाज करने के लिए जिला अस्पताल में 10 बेड का पोस्ट कोविड वार्ड स्थापित तो कर दिया गया है लेकिन वहां की व्यवस्था भगवान भरोसे हैं।
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स्वास्थ्य विभाग के लोगों का कहना है कि वार्ड में एक मनोचिकित्सक की तैनाती की गई है जो आने वाले मरीजों की काउंसिलिंग कर उनका इलाज कर रहे हैं। परंतु हकीकत यह है कि पोस्ट कोविड मरीजों की समस्या सुलझाने वाला कोई नहीं है। पोस्ट कोविड इफेक्ट के रूप में केवल शारीरिक बीमारियां ही नहीं, बल्कि मानसिक चिंताएं भी बढ़ गई हैं। कुछ मरीज तो ऐसे भी हैं जो हमेशा पल्स ऑक्सीमीटर से ऑक्सीजन सेचुरेशन की जांच करते रहते हैं। उनके मन में डर बना हुआ है कि कहीं फिर से उनका ऑक्सीजन लेबल कम न हो जाए।
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कोविड से ठीक हुए मरीजों में पैदा हो रहीं ये समस्याएं
जौनपुर। कोरोना संक्रमण से ठीक होने के बाद भी मरीजों के फेफड़ों पर इसका असर लंबे समय तक दिख रहा है। मानसिक रोग विशेषज्ञ डा. हरिनाथ यादव का कहना है कि निगेटिव हुए मरीजों में तमाम तरह की समस्याएं पैदा हो रही हैं। मन में डर, नींद नहीं आना, सिर दर्द, घबराहट, अवसाद की समस्या से लोग पीड़ित हैं। ऑक्सीजन सेचुरेशन को लेकर चिंता, सूखी खांसी आना जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं।
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इलाज के लिए नहीं आ रहे पोस्ट कोविड के मरीज
जौनपुर। जिला चिकित्सालय के मन (मानसिक अस्पताल) अस्पताल में तैनात मनोचिकित्सक डा. ओंकार भारती का कहना है कि सप्ताह में तीन दिन उनकी ड्यूटी जिला अस्पताल में लगाई गई है। अभी तक कोई ऐसा मरीज नहीं अपनी समस्याएा लेकर नहीं आया है, जो कोविड संक्रमण से ठीक हुआ हो और उसे कोई परेशानी हो रही हो। यदि पोस्ट कोविड की समस्या से पीड़ित कोई मरीज आता है तो उसका निदान किया जाएगा।
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