जौनपुर। खतौनी के अभाव में जिले के 17558 किसानों की सम्मान निधि अटक गई है। इन किसानों ने सहज जनसेवा केंद्रों से योजना के अंतर्गत ऑनलाइन पंजीकरण तो करा लिया, लेकिन खतौनी की छाया प्रति कृषि विभाग में नहीं जमा की। ऐसे में इन किसानों का डाटा लॉक नहीं हो पा रहा है। इसके अभाव में इन किसानों को अभी तक योजना का लाभ नहीं मिल पाया है। जानकारी के अभाव में किसान आए दिन तहसील और बैंक का चक्कर लगा रहे हैं।
फरवरी में लागू हुई प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि के तहत प्रत्येक किसान को वर्ष में तीन किश्तों में छह हजार रुपये देने की व्यवस्था की थी। पहले इसमें लघु सीमांत किसानों को पात्र माना गया था। बाद में सभी किसानों को शामिल कर लिया गया। लाभ पाने के लिए किसानों को विभागीय पोर्टल पर ऑनलाइन पंजीयन के अलावा अपने खतौनी, बैंक पास बुक, आधार कार्ड की प्रति सहित अन्य दस्तावेज कृषि विभाग में जमा कराने थे। किसानों के पंजीकरण की शुरुआत पहले कृषि विभाग व तहसील मुख्यालयों पर जोर शोर से हुई। इसके बाद उन्हें सहज जनसेवा केंद्रों व अन्य माध्यमों से भी ऑनलाइन पंजीकरण कराने की छूट दी गई। जिले के तमाम किसानों ने ऑनलाइन पंजीयन तो करा लिया, लेकिन खतौनी जमा करना वह भूल गए। जिले के 21 ब्लाकों के कुल 6 लाख 55 हजार किसानों ने अपना पंजीकरण कराया है। इन किसानों को सत्यापन के बाद योजना से क्रमवार जोड़ा जाता रहा। दिसंबर में जांच के दौरान जिले में सहज जन सेवा केंद्र सहित अन्य माध्यमों से पंजीकरण कराने वाले 17558 लाभार्थी ऐसे पाए गए, जिनके खतौनी की छाया प्रति कृषि विभाग में जमा नहीं है। लिहाजा इन किसानों का डाटा योजना का लाभ देने के लिए लॉक नहीं हो पाया है।