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Jaunpur News: ईरान-भारत रिश्तों की मिसाल बना जौनपुर, शिया कॉलेज में दिखा गंगा-जमुनी संगम

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आयतुल्लाह डॉ. अब्दुल मजीद हकीम इलाही। आयोजक
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जौनपुर। नगर के शिया कॉलेज में आयोजित मजलिस इस बार केवल धार्मिक आयोजन तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसने सामाजिक एकता, भाईचारा और इंसानियत का बड़ा संदेश दिया। बृहस्पतिवार की रात ईरान के दिवंगत सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामनेई के प्रतिनिधि, अयातुल्ला डॉ. अब्दुल मजीद हकीम इलाही ने शिरकत कर संबोधन दिया। ईरान कल्चर हाउस दिल्ली से आए डॉ. हकीम इलाही ने कहा कि जौनपुर की तहजीब, इल्म की परंपरा और गंगा-जमुनी संस्कृति पूरी दुनिया के लिए मिसाल है। उन्होंने भारत और ईरान के ऐतिहासिक और गहरे सांस्कृतिक, शैक्षिक और सामाजिक रिश्तों पर प्रकाश डाला। उनका कहना था कि अलग-अलग धर्म और देशों के बावजूद इंसानियत सबसे ऊपर है। उन्होंने यह भी बताया कि ईरान और हिंदुस्तान का रिश्ता किसी एक दौर का मोहताज नहीं है, बल्कि यह सदियों पुराना रिश्ता है जो दिलों, मोहब्बत और साझा विरासत से जुड़ा है। जब-जब मुश्किल वक्त आया, दोनों देशों की अवाम ने एक-दूसरे के लिए हमदर्दी और समर्थन दिखाया है। आज की दुनिया में बढ़ती नफरत और बंटवारे की सियासत के बीच जौनपुर जैसे शहर यह साबित करते हैं कि इंसानियत और भाईचारा अब भी जीवित है। हिंदू और मुसलमान यहां न सिर्फ साथ रहते हैं, बल्कि एक-दूसरे के दुख-सुख में भी शरीक होते हैं। मजलिस में महिलाओं, युवाओं और बुज़ुर्गों की भीड़ उमड़ी। शिया और सुन्नी समुदाय के साथ-साथ अन्य वर्गों की उपस्थिति ने इसे सामाजिक संगम बना दिया। मौके पर सुन्नी समुदाय और विभिन्न अंजुमनों ने सबील लगाई। मौलाना तकी नकवी, मौलाना कमर हसनैन, लखनऊ के टीले वाली मस्जिद के इमाम मौलाना कारी शाह फजलुल मन्नान रहमानी और शेर वाली मस्जिद के इमाम मौलाना कारी जिया जौनपुरी ने भी तकरीर की। मजलिस का संचालन विख्यात शायर अनीस जायसी ने किया। डॉ. हकीम इलाही ने अंत में कहा कि हर धर्म इंसानियत, शांति और मोहब्बत का पैगाम देता है, नफरत नहीं, और यही असली ताकत है किसी समाज की।

आयतुल्लाह डॉ. अब्दुल मजीद हकीम इलाही। आयोजक

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