विधानसभा चुनाव के दौरान भारी संख्या में लोगों के नाम मतदाता सूची से काटने के मामले में जांच शुरू हो गई है। 700 से अधिक लोगों ने जान बूझकर नाम काटने का आरोप लगाते हुए डीएम से शिकायत की है। जिलाधिकारी ने सभी निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों से दस दिन में रिपोर्ट मांगी है।
जिले की आबादी 4876912 है। चुनाव आयोग मोटे तौर मतदाताओं की संख्या कुल आबादी का 65 प्रतिशत मानता है। इस चक्कर में जिले के निर्वाचन कार्यालय से तकरीबन तीन लाख मतदाताओं के नाम सूची से हटा दिए गए। इसके बाद पूरे जिले में मतदाताओं का अनुपात 64.76 प्रतिशत हो गया। इसमें 59.89 महिलाएं और 69.74 प्रतिशत पुरुष थे। चुनाव के दिन लोग मतदान करने गए तो नाम गायब देख अवाक रह गए।
इस गड़बड़ी के शिकार होने वाले में पूर्व विधायक सुरेंद्र सिंह, वरिष्ठ अधिवक्ता वीडी सिंह, सहित 20 से अधिक ग्राम प्रधान और उनके परिवारों के लोगों के अलावा एडीएम के स्टेेनो तक शामिल थे। बता दें कि चुनाव आयोग का 11 दिसंबर 2013 का सर्कुलर है कि किसी मतदाता का नाम काटने से पहले उसे नोटिस दिया जाएगा। उसकी सुनवाई के बाद ही किसी का नाम काटा जा सकता है। लेकिन नियम को ताक पर रखकर मनमाने तरीके से लोगों के नाम काटे गए।
कई उम्मीदवार तो अपनी हार का ठीकरा बड़ी संख्या में मतदाताओं का नाम काटने से जोड़ते हुए प्रशासन पर फोड़ रहे हैं। इस बारे में डीएम डा. बलकार सिंह ने बताया कि बड़े पैमाने पर शिकायतें आई हैं। इस संबंध में स्पष्टीकरण तलब किया गया है। जवाब आने के बाद कार्रवाई की जाएगी।