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बारिश में बढ़ा सर्पदंश का खतरा: जौनपुर में 15 महीने में 52 लोगों की मौत, दो करोड़ रुपये मिला मुआवजा

Sat, 25 Jul 2026 03:02 PM IST
Pragati Chand अमर उजाला नेटवर्क, जौनपुर।

सार

Jaunpur News: बारिश में सर्पदंश की घटनाएं बढ़ गई हैं। इनमें अधिकांश मौत अंधविश्वास के कारण झांड़- फूंक के चक्कर में फंसकर इलाज कराने में देरी और हार्ट अटैक से हुई है।
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जहरीला सांप - फोटो : Adobe Stock
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विस्तार
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जौनपुर जिले में बारिश में सर्पदंश की घटनाएं काफी बढ़ गई हैं। रोजाना तीन से चार मामले सामने आ रहे हैं। आपदा विभाग के आंकड़ों के मुताबिक पिछले 15 महीनों में 52 लोगों की मौत सर्पदंश से हुई है। हालांकि ये वो आंकड़ा है, जिसमें लोगों ने पोस्टमार्टम कराया और उनके आश्रितों को सरकार की ओर से चार-चार लाख रुपये आर्थिक मदद दी गई। कुल दो करोड़ का मुआवजा दिया गया। 

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रिपोर्ट में देखा गया कि अधिकांश मौत अंधविश्वास के कारण झांड़- फूंक के चक्कर में फंसकर इलाज कराने में देरी और हार्ट अटैक से हुई है। सबसे अधिक मौत शाहगंज तहसील क्षेत्र में 17 लोगों ने जान गंवाई हैं। दूसरे नंबर पर मछलीशहर तहसील हैं। यहां पर 11 लोगों की जान गई। 

इस साल की बात करें तो 1 अप्रैल से अब तक सर्पदंश से सात लोगों की जान गई, मछलीशहर तहसील में 3, शाहगंज तहसील में दो, बदलापुर और मड़ियाहूं में एक-एक मौत हुई। घटना पर नजर करें तो बदलापुर में बरैयापुर गांव निवासी निर्मला, शाहगंज में कम्मरपुर में सुदामा, सफीपुर गांव में बृहस्पतिवार सुबह एक रिटायर्ड होमगार्ड फूलचंद, मछलीशहर के रसूलपुर निवासी मालती, मीरपुर की उषा देवी, अमाई के आदर्श की मौत हो गई। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों पर गौर करें तो जिला चिकित्सालय में एक साल में औसतन 100 से 150 मामले सर्प दंश के आते हैं। 
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सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मड़ियाहूं के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. अरुण कुमार भारती ने बताया कि मड़ियाहूं में 1 जुलाई से 20 जुलाई तक सर्प दंश की 56 घटनाएं हुई हैं। पीड़ित को पांच से 20 वाइल तक सांपों के जहरीले होने के अनुसार एंटी स्नेक वेनम लगाना पड़ता है। 

डॉ. अशोक यादव बताते हैं कि सर्प की दो सौ से अधिक प्रजातियां हैं। इन प्रजातियों में 70 प्रतिशत जहरीले नहीं होते हैं। पूर्वांचल में कोबरा, करैत व वाइपर ही अधिक विषैले हैं। आमतौर पर सर्प बिल, उपले, पुराने घरों में रहते हैं, जिन्हें रोकने के कारगर उपाय नहीं है।
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