जौनपुर। साहित्य वाचस्पति डॉ. श्रीपाल सिंह क्षेम की 98वीं जयंती पर बुधवार को क्षेमस्विनी संस्था की ओर से समारोह आयोजित हुआ। इसमें डॉ. क्षेम के व्यक्तित्व-कृतित्व पर चर्चा करते हुए राष्ट्र निर्माण में उनके योगदान को सराहा गया। डॉ. श्रीपाल सिंह क्षेम की पुस्तक नीलम ज्योति और संघर्ष का लोकार्पण किया गया।
बतौर मुख्य अतिथि एमएलसी विद्यासागर सोनकर ने कहा कि डॉ. क्षेम ने साहित्य के क्षेत्र में जौनपुर को पहचान दी। बिना किसी पद पर रहे और बिना धन के उन्होंने जो सम्मान प्राप्त किया वह किसी के लिए दुर्लभ है। उन्होंने डॉ. क्षेम की प्रतिमा शहर में स्थापित कराने का भरोसा दिया। विशिष्ट अतिथि एसपी अशोक कुमार ने कहा कि डॉ. क्षेम ने साहित्य के माध्यम से समाज को बहुत कुछ दिया है। इसके लिए समाज उनका ऋणी रहेगा। व्यंग्यकार सभाजीत द्विवेदी प्रखर ने नीदिया घरों से देखों, धूपिया मुंडेरा है, जब से जागो तभी से सवेरा है... और एक पल ही जियो, फूल बनकर जियो शूल बनकर ठहरना नहीं जिंदगी... जैसी कविताओं से डॉ. क्षेम के व्यक्तिव पर प्रकाश डाला। क्षेमस्विनी संस्था के अध्यक्ष वशिष्ठ नारायण सिंह ने कहा कि डॉ. क्षेम वस्तुत: प्रेम और श्रृंगार के कवि थे। टीडी कॉलेज के प्रबंधक अशोक कुमार सिंह ने कहा कि उनकी कविताएं आज भी समाज के लिए मार्ग दर्शक काम कर रही है। कार्यक्रम में सुधीर सिंह, प्रदीप सिंह, रत्नाकर सिंह, ऋषि सिंह, भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता ओमप्रकाश सिंह, दिनेश कुमार सिंह बब्बू, अशोक श्रीवास्तव, राजेश सिंह, डॉ. पीपी दूबे, शशिराज सिन्हा, डॉ. राकेश सिंह, रामदयाल द्विवेदी, राजीव पाठक, सर्वेश सिंह, लोलारक दुबे आदि मौजूद रहे। आभार ज्ञापन संस्था के महामंत्री शशिमोहन सिंह क्षेम ने किया। संचालन डॉ. मधुकर तिवारी ने किया।