जौनपुर। शहर में बहने वाली प्रमुख नदी गोमती की चौड़ाई बीते छह महीने में 150 मीटर से सिमट कर महज 20 मीटर रह गई है। नदी के किनारों से लेकर करीब 40 फीट तक पानी नहीं है। आलम यह है कि लोग नदी के बीचोबीच खड़े होकर सेल्फी ले रहे हैं या फोटो खींच रहे हैं। सद्भावना पुल के पास तो नदी शायद 70 फीट भी चौड़ी न हो। गोमती नदी जौनपुर जिले के बदलापुर से होते हुए शहर में प्रवेश करती है और फिर वाराणसी के मारकंडेय महादेव धाम कैथी में जाकर मिल जाती है। शहर में सद्भावना पुल के नीचे गोमती के तट पर पर्यटन विभाग और नमामि गंगे द्वारा घाट का निर्माण कराया गया। शहर निवासी व स्वच्छ गोमती अभियान के अध्यक्ष गौतम गुप्ता ने बताया कि बीते छह महीने पूर्व पर्यटन विभाग और नमामि गंगे के तहत नदी के दोनों किनारों पर घाट का निर्माण शुरू हुआ। इस निर्माण के दौरान शाही किले की ओर शाही पुल के दो ताखे घाट का पाथ वे बनाने के लिए बंद कर दिए गए। इससे नदी के पानी ने रास्ता बदला और चौड़ाई घट गई। यही नहीं गौतम ने बताया कि घाट का निर्माण एनजीटी के नियमों के खिलाफ हो रहा है और जो भी कार्य अभी तक कराए गए हैं, उसके लिए भी दोनों विभागों ने एनओसी नहीं ली। नदी में अतिक्रमण के कारण केवल शाही पुल से सद्भावना पुल तक ही नदी की चौड़ाई कम दिखेगी। इसके बाद नदी अपने पूरे स्वरूप और पानी के साथ प्रवाहित होती है।