बाजार में निवेश करने से पूर्व अपने सभी दस्तावेजों को ध्यानपूर्वक पढ़ें, यह बाजार जोखिमों के अधीन है। कुछ ऐसे ही संदेश प्रचार माध्यमों के जरिए चिट फंड, शेल कंपनियां लोगों को निवेश के लिए कई तरह के लालच देकर आकर्षित करती हैं। ऐसे संदेशों से आकर्षित हुए जिले के 92 हजार से अधिक लोगों का पैसा चिट फंड, म्यूचल फंड के नाम पर बनी शेल कंपनियों में फंस गया है।
आंकड़ों पर गौर करें तो शहरी के मुकाबले ग्रामीण अंचलों के लोग मकान मिलने जैसी कई लुभावनी योजनाओं से आकर्षित होकर अपनी जमा पूंजी निवेश के नाम पर फंसा बैठे हैं। केंद्र सरकार की तरफ से सभी जिलों में इसके लिए आवेदन लिए जा रहे हैं कि कितने ऐसे लोग हैं जिन्होंने इन कंपनियों में आवेदन लिया है। आंकड़ा इकठ्ठा करके भविष्य में पैसा वापस कराने के लिए रणनीति भी बनाई जा सकती है।
जनपद के 92 हजार 291 लोगों ने विभिन्न कंपनियों में इस वजह से निवेश किया है कि जिससे उनका भविष्य सुरक्षित रह सके। इसमें किसी ने फ्लैट व घर की बुकिंग करा रखी थी तो किसी ने पैसों की बढ़ोतरी के लिए म्युचुअल फंड व शेयर में निवेश कर रखा था। मगर निर्धारित समय पर इनको न घर मिल सका, न ही शेयर व म्युचुअल फंड में लगाए गए रुपये। हालत तो यह है कि लोग अपना मूलधन भी वापस लेने के लिए कंपनियों के दफ्तर में कई साल से चक्कर काट रहे हैं। जहां इनको सही जवाब नहीं मिलता है। इन कंपनियों में पीएसीएल व सहारा जैसी नामचीन कंपनियां भी है, जो अभी भी ठीक स्थिति में है। शासन से निर्देश के क्रम में पहले जिला मुख्यालय पर करीब तीन व चार मार्च से ऐसे लोगों के आवेदन लिए गए, जिसमें जिले के कोने-कोने से पीड़ित लोग आने लगे। किसी का तीन लाख तो किसी का दस लाख से अधिक का निवेश इन कंपनियों में है। मुख्यालय पर भीड़ अधिक होने पर इन आवेदनों को समस्त तहसीलों में लेने का भी निर्देश दिया गया। अधिकारियों के मुताबिक, 31 मार्च को करीब 11 हजार से अधिक आवेदन आए।
तहसीलवार निवेशकों के 31 मार्च तक आए आवेदन
-तहसील-आवेदनों की संख्या
-सदर-15534
-मड़ियाहूं-21716
-मछलीशहर-24771
-बदलापुर-19530
-शाहगंज-1154
-केराकत-9586
-कुल योग-92,291
विभिन्न कंपनियों में निवेश करने वाले उपभोक्ताओं का आवेदन लिया जा रहा है। जिनके रुपये वर्षों से नहीं वापस हुए हैं। इसके लिए जिला मुख्यालय से लेकर तहसीलों में आवेदन लिए जा रहे हैं। जिसको शासन को भेजा जाएगा, इस पर क्या निर्णय होगा, इसकी जानकारी नहीं है। -राम अक्षयबर चौहान, अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व।