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जौनपुर की इमरती को मिलेगा जीआई, सुगंध होगी पेटेंट

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जौनपुर। शिराज-ए-हिंद की धरती पर बनने वाली इमरती की मिठास की दुनिया दीवानी है तो यहां का मनभावन इत्र भी सबके कायल करता रहा है। प्रदेश सरकार ने इमरती और इत्र को स्थानीय पहचान दिलाने का काम शुरू कर दिया है। शुक्रवार को जब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने यहत जानकारी दी।
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वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय के एकलव्य स्टेडियम में आयेेजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने तीन साल पहले की बात को याद करते हुए जिला प्रशासन के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन ने यहां के इत्र को फिर को फिर से प्रतिष्ठित किया है। अब इसे वैश्विक मंच ले जाने की जरूरत है। इमरती को जीआई (ज्योग्राफिकल इंडिकेशन) पेटेंट का दर्जा दिलाने के लिए कार्यवाही प्रारंभ हुई है। जीआई पेटेंट मिलने के बाद इस तरह की इमरती और सुगंध की पहचान जौनपुर से ही जुड़ जाएगी। कोई इसकी नकल नहीं कर पाएगा।
क्या खासियत होती है जौनपुर की इमरती की
जौनपुर की इमरती अपनी सादगी और शुद्धता की बदौलत पहचानी जाती है। इसको बनाने में देशी धी और देशी चीनी (खांड) का इस्तेमाल किा जाता है। आमतौर पर इमरती गर्म ही खाई जाती है लेकिन यहां की इमरती का स्वाद ठंडा पर भी बरकरार रहता है। बिना फ्रिज के इसे कई दिनों तक इसे रखा जा सकता है, जल्दी खराब नहीं होती। अपनी इसी खासियत की बदौलत इसे लोग दूसरे शहरों या देशों में लेकर जाते हैं।
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