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अवैध निर्माण और प्लाटिंग पर चलेगा प्रशासन का डंडा

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शहर के नखास मोहल्ले में गोमती नदी के किनारे बने मकान। - फोटो : JAUNPUR
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जौनपुर। ग्रीन बेल्ट, तालाब, पोखरा और सार्वजनिक उपयोग वाली भूमि पर भी अनधिकृत रूप से कब्जा कर निर्माण कराने और बिना नक्शा पास कराए भवन निर्माण कराने वाले लोगों के खिलाफ जल्द कार्रवाई की जाएगी। विनियमित क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले शहर समेत आसपास के 241 राजस्व गांवों में ऐसे अवैध निर्माण गिराये जाएंगे और अवैध प्लाटिंग के खिलाफ भी कार्रवाई होगी। इसके लिए सिटी मजिस्ट्रेट के नेतृत्व में तीन सदस्यीय टीम गठित की गई है जो अतिक्रमण को चिह्नित कर रही है।
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करीब छह सौ साल पुराने शहर को सुव्यवस्थित तरीके से बसाने के लिए महायोजना (मास्टर प्लान) 2021 तैयार की गई थी। इसमें शहर के अलावा आसपास के 241 राजस्व गांव शामिल हैं। इसमें आवासीय, व्यावसायिक, ग्रीन बेल्ट, कृषि क्षेत्र, तालाब-झील आदि के क्षेत्र और उनका दायरा निर्धारित किया गया है। महायोजना के दायरे में आने वाले क्षेत्र में किसी भी तरह का आवासीय, व्यावसायिक निर्माण कराने से पहले विनियमित क्षेत्र के प्राधिकारी अधिकारी (सिटी मजिस्ट्रेट) से अनुमति लेनी जरूरी है। इससे इतर धड़ल्ले से लोग बिना अनुमति के निर्माण कराते जा रहे हैं। शहरी क्षेत्र में ग्रीन बेल्ट, तालाब, पार्क, सड़क की भूमि पर तमाम लोगों ने कब्जा कर लिया है। वहां बहुमंजिले निर्माण भी करा लिए गए हैं। शहर से सटे गांवों में कृषि की भूमि का डायवर्जन कराए बिना ही प्लाट बना दिए गए हैं। कई अवैध कालोनियां भी तैयार हुई हैं। अब अवैध निर्माण के खिलाफ अभियान चलाने की कवायद शुरू हो गई है। सिटी मजिस्ट्रेट के नेतृत्व में तीन सदस्यीय समिति गठित की गई है। यह समिति सचिव मास्टर प्लान के जेई और सभी हलका लेखपाल इसके सदस्य बनाए गए हैं।
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अतिक्रमण की चपेट में कई इलाके
शहरी क्षेत्र में कई इलाके ऐसे हैं, जो अतिक्रमण की चपेट में हैं। चांदमारी के लिए आरक्षित क्षेत्र में सैकड़ों मकान बन गए हैं। सिटी स्टेशन के पीछे का हिस्सा कार्यालय व विविध कार्य के लिए आरक्षित है लेकिन यहां तमाम मकान बन गए हैं। बदलापुर पड़ाव क्षेत्र में गोमती के किनारे ग्रीन बेल्ट की भूमि पर आवास निर्मित हैं तो मतापुर, पुरानी बाजार, जगदीशपुर, नईगंज, कलीचाबाद सहित कई क्षेत्रों में कृषि भूमि की प्लाटिंग कर आवासीय बना दिया गया है। इनमें से ज्यादातर ने कृषि भूमि का अब तक डायवर्जन ही नहीं कराया है। प्लाट खरीदने वालों को इसकी जानकारी तब होती है, जब वे नक्शा पास कराने विनियमित क्षेत्र के दफ्तर पहुंचते हैं।
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प्रतिबंधित क्षेत्र में बन गए मकान
तुगलक काल में बसे शहर में कई ऐतिहासिक व पुरातात्विक महत्व के स्थल हैं। इन्हें पुरातत्व विभाग ने संरक्षित कर रखा है। इन भवनों के सौ मीटर के दायरे में किसी तरह का निर्माण कराना प्रतिबंधित हैं। बावजूद तमाम लोग मनमाने ढंग से लगातार निर्माण कराते जा रहे हैं। पुरातात्विक स्थलों से सटाकर ही तमाम निर्माण हुए हैं। अटाला मस्जिद, शाह फिरोह का मकबरा, चार अंगुल मस्जिद, शाही किला, झंझरी मस्जिद, लाल दरवाजा सहित अन्य धरोहरों के आसपास हाल के वर्षों में काफी निर्माण हुए हैं। इनमें ज्यादातर ने मास्टर प्लान से अनुमति भी नहीं ली है। इसी तरह मास्टर प्लान में मोहल्लों, कालोनियों में सड़कों और गलियों की चौड़ाई के मानक को दरकिनार कर लोगों ने बढ़ाकर निर्माण करा लिया है। यह सभी भवन अवैध निर्माण की श्रेणी में चिह्नित किए जाएंगे।
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भवन निर्माण के दौरान बरतें सावधानी
आवास के लिए भूमि खरीदते वक्त यह जरूर पता करें कि वह कृषि, ग्रीन बेल्ट या प्रतिबंधित क्षेत्र की तो नहीं।
भवन निर्माण से पहले विनियमित क्षेत्र प्राधिकारी अधिकारी कार्यालय से नक्शा स्वीकृत कराएं।
भवन निर्माण से पहले सामने का कुछ हिस्सा खाली छोड़ दें।
गली या सड़क की ओर छज्जा निकालने से बचें ताकि रास्ता तंग न हो।
कृषि भूमि की प्लाटिंग से पहले उसका आवासीय रुप में परिवर्तन कराना अनिवार्य है।
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विनियमित क्षेत्र के अंतर्गत अवैध निर्माण व प्लाटिंग के विरुद्ध अभियान के लिए टीम गठित हो चुकी है। शीघ्र ही सभी लेखपालों की बैठक कर उन्हें नियम के बारे में बताया जाएगा। इसके बाद ऐसे निर्माण को चिह्नित कर ध्वस्तीकरण व वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। बिना अनुमति निर्माण कराने वालों को किसी तरह ही राहत नहीं मिलेगी। -रोहन यादव, जेई, मास्टर प्लान।
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