जौनपुर। जिला अस्पताल में संचालित डायलिसिस यूनिट में बेड की संख्या पर्याप्त नहीं होने के कारण मरीजों को डायलिसिस की सुविधा ठीक से नहीं मिल पा रही है। अस्पताल में 15 बेड पर मरीजों का नियमित इलाज चल रह है। मरीजों को समय से डायलिसिस की सुविधा उपलब्ध कराने के लिए बेडों की संख्या बढ़ाने की जरूरत है। बेड कम होने के कारण जरूरतमंदों को ढाई से तीन माह तक इंतजार करना पड़ रहा है।
आंकड़ों के अनुसार, 90 मरीजों का इलाज नियमित रूप से चल रहा है। 70 मरीज प्रतीक्षा में हैं। मरीजों के परिजन हर दिन नंबर पाने के लिए जिला अस्पताल का चक्कर लगा रहे हैं। अस्पताल में पहले दस बेड पर ही डायलिसिस होती थी। करीब एक साल पहले पांच बेड भले ही बढ़ गए हैं, लेकिन वह भी पर्याप्त नहीं हैं। 70 मरीज ऐसे हैं जिनको डायलिसिस सुविधा की जरूरत है, लेकिन बेड की संख्या सीमित होने के कारण उन्हें इसकी सुविधा नहीं मिल पा रही है।
रोस्टर बनाकर की जा रही है डायलिसिस
जौनपुर। सेंटर मैनेजर मनीष यादव ने बताया कि डायलिसिस के लिए रोस्टर बनाकर मरीजों को सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। कुछ मरीजों का सोमवार, बुधवार और शुक्रवार के अलावा कुछ मरीजों को मंगलवार, बृहस्पतिवार और शनिवार को डायलिसिस की जा रही है। रोस्टर बनाकर मरीजों के डायलिसिस की तिथि तय कर दी गई है। उसी के हिसाब से सुविधा दी जा रही है। जिसकी डायलिसिस चल रही है उसका नंबर रोका नहीं जा सकता है इस समय 93 मरीजों की डायलिसिस चल रही है। 75 लोग प्रतीक्षा सूची में हैं। बेड तभी खाली होता है, जब कोई दूसरी जगह चला जाता है या फिर उसकी मौत हो जाती है।
निजी अस्पतालों में खर्च करना पड़ता है 1000 से 25 सौ रुपये
जौनपुर। जिला अस्पताल में पंजीकृत मरीजों को एक रुपये की पर्ची पर डायलिसिस की सुविधा दी जा रही है। जबकि निजी केंद्रों पर डायलिसिस के लिए एक हजार से 25 सौ रुपये एक बार डायलिसिस कराने के लिए देना पड़ता है। शुल्क अधिक होने के कारण निजी अस्पतालों में यह सुविधा लेने से मरीज परहेज करते हैं। कई लोगों को इलाज तो वाराणसी और अन्य स्थानों पर चल रहा है।