सिद्दीकपुर स्थित कांशीराम शहरी आवास में सजाया गया लक्ष्मी गणेंश जी पंडाल। संवाद
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मछलीशहर। दीपावली पर इस वर्ष लक्ष्मी पूजन का सुखद संयोग प्राप्त हो रहा है। वर्ष सोमवार को अमावस्या शाम पांच बजकर पांच मिनट से शुरू होगी।
ज्योतिष एवं तंत्र आचार्य डॉ. शैलेश मोदनवाल ने बताया कि इस वर्ष दीपावाली पर विष कुंभ योग बन रहा है जो कि अशुभ योगों में गिना जाता है। ऐसे में लक्ष्मी पूजन के बाद शिव पंचाक्षरी मंत्र का जाप करना चाहिए। अतिरिक्त चंद्रमा एवं बुध की कन्या राशि में युति से शुभ संयोग प्राप्त हो रहा है। इसका अच्छा प्रभाव कारोबार पर होगा। देव गुरु बृहस्पति अपनी राशि में मीन और शनि अपनी राशि मकर में मार्गी हो गए हैं। यह सभी राशि के जातकों के लिए शुभ है। पंच दीपोत्सव का मुख्य दिन दीपावली है। कार्तिक मास में ही लक्ष्मी प्रकट हुई थीं। इसी वजह से दीपावली के दिन मां लक्ष्मी के पूजन की परंपरा है।
लक्ष्मी पूजन का मुहुर्त
पंडित देवीप्रसाद मिश्र ने बताया कि प्रदोषकाल में सायंकाल 5 बजकर 15 मिनट बजे से 6 बजकर 15 मिनट तक, उसके बाद वृष लग्न में रात 6 बजकर 37 मिनट तक, रात 8 बजकर 33 मिनट तक, सिंह लग्न में रात्रि 1 बजकर पांच मिनट से 3 बजकर 18 मिनट तक लक्ष्मी पूजन का शुभ मुहूर्त है।