सिंगरामऊ क्षेत्र के रजनीपुर में चल रही श्रीमदभागवत कथा। स्रोत-संवाद
सिंगरामऊ। क्षेत्र के रजनीपुर गांव में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा में कथाव्यास आचार्य गिरीश चंद्र मिश्रा महाराज ने श्रोताओं को बताया कि धर्म सम्मत आचरण करना ही मानव धर्म है। माता-पिता की सेवा करना ही सच्ची भक्ति है। ईश्वर प्रेम का भूखा होता है यदि प्रेम प्रकट हो जाए तो परमात्मा खुद प्रकट हो जाते हैं। उन्होंने कहा की श्रीमद्भागवत कथा सुनने मात्र से ही जीवन धन्य हो जाता है, लोक परलोक दोनों सुधर जाते हैं, लेकिन माया रुपी संसार में जीवन को धर्म के मार्ग पर लगाना अत्यधिक कठिन कार्य है। कथा के दौरान श्री कृष्ण रुक्मिणी विवाह का प्रसंग प्रस्तुत कर श्रोताओं का दिल जीत लिया। इस मौके पर एक भव्य झांकी भी आयोजित की गई, जो की आकर्षण का केंद्र रहा। हरि नाम संकीर्तन, गाजे बाजे की धुन पर श्रद्धालु झूम उठे। महिलाओं ने मंगल गीत गाया। आचार्य ने वैदिक रीति से विवाह संस्कार संपन्न कराया। मुख्य यजमान कमलेश्वर दुबे व बृज कुमार दुबे ने भगवान के चरण धोकर पूजन अर्चन किया। अंत में भागवत भगवान की आरती कर प्रसाद वितरण किया गया। इस अवसर पर अमरनाथ दुबे, विनय दुबे, रमेश चंद्र दुबे, राजीव दुबे, अनिल दुबे, सुनील, विनीत दुबे, सुजल दुबे, आयुष दुबे, माधव, राघव, शिवाय सहित भारी संख्या में श्रद्धालुओं ने कथा का रसपान किया।