खानापट्टी गांव स्थित अवधूत कुटी पर बनौरा आश्रम छत्तीसगढ़ (रायगढ़) पीठाधीश्वर अघोर संत शिरोमणि प्रियदर्शी राम ने रविवार को श्रद्धालुओं को अमृत रूप कथा का रसपान कराते हुए जीवन के गूढ़ रहस्यों से परिचित कराया।
उन्होंने बताया कि मानव जीवन अमूल्य है। जीव कई जन्मों के सतकर्मों के फलस्वरूप मानव योनि में आता है। इस कथन को गोस्वामी तुलसीदास ने मानस में लिखा है। बड़े भाग मानुस तन पावा, सुर दुर्लभ सदग्रंथन गावा। जिस मानव तन की महिमा सदग्रंथों ने गाई है, उसे बेकार के कार्यों में न गवाएं। हम इर्ष्या, द्वेष कलह और दुर्व्यसनों में संलिप्त हैं। इसी कारण अधोपतन को प्राप्त होते हैं। जीवन की सार्थकता तभी है, जब उसे परोपकार में लगाएं। संत महात्माओं ने भी मानव कल्याण के लिए यही रास्ता बताया। पवित्र मन से भाई-भाई, माता-पिता, बहन के साथ-साथ पास पड़ोस के लोगों के साथ भी सदव्यवहार करना चाहिए। इससे आपको मानसिक शांति मिलेगी। जब तक मानसिक शांति नहीं होगी, सारे कार्य निष्फल होंगे। इन सभी कल्याणकारी प्रतिफलों के लिए पुरुषार्थ जरूरी होता है। पुरुषार्थ से जीवन के सारे लक्ष्य प्राप्त किए जा सकते हैं। धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष ये चारों लक्ष्य मानव जीवन के लिए निर्धारित हैं, जिसमें सबका निचोड़ अंतिम लक्ष्य मोक्ष ही है। इससे पहले कुटी पर सुबह की आरती में शामिल हुए। प्रमुख रूप से डॉ. विनोद कुमार उनकी पत्नी डॉ. अंजू, विजय कुमार, ब्रह्मचारी, विनीत शाल्जू, दुष्यंत कुमार, अवधेश कुमार, जितेंद्र सिंह, अमित श्रीवास्तव, विजय कुमार, अनिल कुमार आदि मौजूद रहे। कुटी के आचार्य दिलीप पारीक ने आभार जताया।