शारदीय नवरात्र में शक्ति उपासना के लिए दुर्गापूजा पंडालों की साज सज्जा शुरू हो गई है। समितियों के बीच प्रतिस्पर्धा के चलते इस बार श्रद्धालुओं को एक से एक आकर्षक पूजा पंडाल दिखाई देंगे। किसी पंडाल को मानव जीवन चक्र तो किसी को वाराणसी कैंट स्टेशन के मॉडल में तैयार किया जा रहा है।
जिले में श्री दुर्गापूजा महासमिति से 735 दुर्गापूजा समितियां जुड़ी हैं। बिना पंजीकरण एक हजार अतिरिक्त समितियां शहर से लेकर ग्राम्यांचलों तक दुर्गा पूजा करती हैं। कोलकाता और अन्य प्रांतों से आए कलाकार पंडालों को अंतिम रूप देने में जुटे हैं। कुछ पंडालों में देवी प्रतिमाएं पहुंच चुकी हैं। मूर्तिकार देवी मूर्तियों को सजाने में लगे हैं। पंडालों को बेहतर रूप से सजाकर पुरस्कार जीतने की होड़ लगी है। अष्टभुजी पूजा समिति कन्हईपुर, मायांजलि पूजा समिति मियांपुर और नवयुग पूजा समिति उर्दू बाजार के पंडाल को बनाने के लिए बाहर से कलाकार बुलाए गए हैं। अष्टभुजी पूजा पंडाल कन्हईपुर को इस बार मानव जीवन चक्र का रूप दिया जा रहा है। श्री महाशक्ति संस्था गौशाला की तरफ से वाराणसी कैंट की डिजाइन बनाई गई है। गीतांजलि संस्था जौनपुर मल्हनी जागेश्वरनाथ मंदिर का मॉडल स्वामी विवेकानंद कन्याकुमारी की तर्ज पर बनाया रहा है। मां शीतला दुर्गा पूजा समिति रसूलाबाद में भी कोलकाता के क्वैन पार्क का डिजाइन तैयार किया जा रहा है, जिसके लिए बाहर कलाकार बुलाकर पंडालों को भव्य रूप दिया जा रहा है। दुर्गापूजा समिति के लोगों ने मूर्ति की खरीदारी के लिए मूर्तिकारों के पास पहुंचकर अपनी मूर्ति के लिए बात की है। शहर के ओलंदगंज फल वाली गली में मां दुर्गा की विशाल मूर्ति पंडाल में रखी जा चुकी है। दुर्गा पूजा पंडाल के लिए कोलकाता से कारीगर बुलाए गए हैं। कई जगह समिति के लोग खुद भी पूजा पंडाल तैयार कर रहे हैं। पूजा पंडाल तैयार करने में पांच से छह लाख रुपये खर्च हो रहा है। पूजा पंडाल पर आने वाले खर्च की परवाह किए बिना पंडालों को भव्य रूप देने की होड़ मची है। इस बाबत श्री दुर्गा पूजा महासमिति के अध्यक्ष मनीष देव ने बताया कि आस्था के पर्व नवरात्र को लेकर समितियों की ओर से पूजा पंडालों को लेकर स्वस्थ प्रतिस्पर्धा अच्छी बात है, जिसका परिणाम है कि हर साल महासमिति की तरफ से इन्हें विभिन्न वर्गों में बेहतर साजसज्जा के लिए सम्मानित भी किया जाता है।