फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

कैसे सुधरेगी मिट्टी की सेहत ,मृदा की जांच पड़ी सुस्त

विज्ञापन
विज्ञापन
कृषि कार्यालय में बनी मृदा परीक्षण लैब में पिछले दो साल से सन्नाटा रहता है। वहां उन्ही के खेतों की मिट्टी की जांच होती है जिसे किसान स्वयं लेकर आते है। 2019 में 3726 नमूने की जांच हुआ था। तब से लेकर अब तक जिले में न तो लक्ष्य आया और न ही जांच के लिए विशेष अभियान चलाए गए। जांच उपकरण भी शो पीस बनकर रह गई है।
विज्ञापन

कृषि विभाग में प्रत्येक वर्ष अप्रैल से मिट्टी जांच का अभियान शुरू होता था। कर्मचारी मिट्टी के नमूनों के लिए गांव-गांव जाते हैं। यह सब दो साल से बंद है। इस वर्ष भी अभी तक लक्ष्य नहीं आया है। वर्ष 2018-19 तक यह अभियान जिले में अनवरत चला। मिट्टी की जांच न होने से किसान परेशान हैं। यह प्रक्रिया कोराना कॉल से बंद हुई थी उसके बाद से सब कुछ संचालित होने लगा था, लेकिन मृदा परीक्षण की यह प्रक्रिया अभी तक गतिमान नहीं हो सकीं। जिसका असर आगामी दिनों में मिट्टी की उर्वरा शक्ति व फसल पर पड़ सकता है। फसले अच्छी हो इसके लिए खेतों की उर्वरा शक्ति को बरकरार रहना जरूरी होता है। यह शक्ति बनी रहे इसके लिए कृषि विभाग की ओर से समय समय पर मृदा परीक्षण आवश्यक है। मृदा परीक्षण के लिए कृषि कार्यलय में मृदा परीक्षण लैब बनाई गई है। दो साल पहले तक प्रयोग शाला में सहायकों की टीम अपने निर्धारित क्षेत्रों में जाकर खेतों की मिट्टी के नमूना लेकर उसे लैब में जांच करती थी। जांच में कमी मिलने पर किसानों को उर्वरता बढ़ाने के उपाय भी बताएं जाते थे। अब यह सब नहीं हो रहा है। अब जो किसान स्वयं मिट्टी लेकर आते है उन्हीं का जांच किया जाता है।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें