नहर में पानी नहीं छोड़ने से किसानों के सामने गेहूं की बोआई पर संकट पैदा हो गया है। पानी के बिना पलेवा ही नहीं हो पा रहा है। जिन किसानों को पंपिंग सेट या पानी के अन्य साधन है उन्होंने किसी तरह गेहूं के खेत को पलेवा कर दिया है, लेकिन जो किसान नहरों पर निर्भर है उनकी बोआई रुकी हुई है।
जिले में 343 नहरे हैं। सिंचाई के लिए तकरीबन 1.66 लाख हेक्टेयर भूमि नहर पर निर्भर है। बावजूद इसके अभी तक किसी भी नहर में पानी नहीं छोड़ा गया। जिला सिंचाई विभाग के मुताबिक, नहरों की सफाई का सीजन शुरू है इस कारण अभी पानी बंद किया गया है। एक व दो दिसंबर के आसपास पानी छोड़ा जाएगा। आठ व 10 दिसंबर तक जिले में पानी पहुंचेगा। ऐसे में खेतों में बोआई से पहले पलेवा के लिए पानी का इंतजार कर रहे किसान समय से बोआई नहीं कर सकेंगे।
डोभी : क्षेत्र के किसान उमाशंकर सिंह, विनय कुमार सिंह, अजीत ने बताया कि गेहूं की बोआई का सीजन अब निकला जा रहा है अभी तक गेहूं के लिए पलेवा नहीं हो पाया है। मजबूरी में अब निजी मशीन वालों से महंगे दाम पर पानी खरीद कर पलेवा करना पड़ रहा है। रामपुर : शारदा सहायक खंड 39 में बीते माह से पानी नहीं आने से किसान चिंतित हैं। क्षेत्र के कोटि गांव, राघोरामपट्टी, कशेरू, रघुनाथपुर के किसान नहर में पानी नहीं आने से गेहूं के खेत का पलेवा नहीं कर सकें है।
सिंगरामऊ : क्षेत्र के लगभग 20 गांव से होकर जाने वाली रामगंज राजबहा नहर में बीते कई माह से पानी नहीं आ रहा है। इस नहर से क्षेत्र के नाभिपुर, हरिहरपुर, बछुआर, तुरकौली,गनौली, कुशहा के किसान सिंचाई करते हे। किसान मनोज सिंह, मुरली यादव, आशुतोष सिंह, छोटू सिंह ने नहरों में पानी छोड़े जाने की मांग की है। मछलीशहर : क्षेत्र के टटिहरा, घिसुआखुर्द, घघरिया, किसुनदासपुर आदि माइनरों में पानी नहीं आ रहा है। जिससे किसान पलेवा नहीं कर पाने के कारण गेहूं नहीं बो पा रहे हैं।