जौनपुर। जनपद में स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही और भ्रष्टाचार ने निजी अस्पतालों को ‘लूट और मौत’ का केंद्र बना दिया है। सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार जिले में केवल 230 अस्पताल ही पंजीकृत हैं लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि शहर के पॉलिटेक्निक चौराहे से लेकर नईगंज और मुरादगंज की गलियों तक अवैध अस्पतालों की बाढ़ आई हुई है। हैरानी की बात यह है कि इन अस्पतालों में बिना किसी वैध मेडिकल डिग्री के झोलाछाप न सिर्फ मरीजों का इलाज कर रहे हैं, बल्कि धड़ल्ले से जटिल ऑपरेशन भी कर रहे हैं। बीते छह महीनों में जिले में इलाज के दौरान लापरवाही से पांच से ज्यादा मौतें हो चुकी हैं। हर बार मौत के बाद अस्पताल संचालक फरार हो जाते हैं और विभाग कागजी कोरम पूरा कर शांत बैठ जाता है। ग्रामीण इलाकों से लेकर जिला मुख्यालय तक सड़क किनारे चल रहे इन अवैध अस्पतालों पर कार्रवाई के बजाय विभाग ने मौन सहमति दे रखी है। तीमारदारों द्वारा एफआईआर दर्ज कराने के बावजूद चंद दिनों की दिखावे की जांच के बाद ये अस्पताल फिर से नए नाम या चोरी-छिपे पुराने ढर्रे पर शुरू हो जाते हैं। रुपयों के लालच और विभागीय मेहरबानी का खामियाजा गरीब मरीजों को अपनी जान गंवाकर भुगतना पड़ रहा है।