खेतासराय। शायर जफर शिराजी की स्मृति में सोमवार की रात नगर के विद्यापीठ परिसर में मुशायरे का आयोजन किया गया। यहां शायरों ने एक से बढ़कर एक मुशायरा पढ़ा और गजल के माध्यम से लोगों को बांधे रखा। हास्य, व्यंग के कवियों ने भी खूब गुदगुदाया। आधी रात तक चले आयोजन में कभी लोग ठहाके मारकर हंसते नजर आए तो ओज की कविताएं जोश भरती रहीं।
मुशायरे की शुरूआत शाइस्ता सना ने कौमी गीत जिस्म है तो हिंदुस्तानी, लेकिन जान तो हिंदुस्तानी है...पढ़ कर किया। इसके बाद हारून आजमी ने दिल से जो बात निकलती है निकल जानें दो सुर्ख होठों को दोआओं से जल जाने दो...गजल पढ़ा। कवियत्री सुलतान जहां ने गजल पढ़ा बेवजह बेसबब वो रुलाता रहा फिर भी उस पर प्यार आता रहा... तथा अली बाराबंकी ने नाजिश मेहर व मेहताब है तू वाह किस दर्जा लाजवाब है तू... सुनाया। इसके अलावा अजम शाकिरी ने बड़ी सर्द हवाएं हैं शबे गम पिघल रही है वो धुआं सा उठ रहा है कोई शाख जल रही है। डंडा बनारसी तथा अयूब वफा ने अपनी हास्य व्यंग्य कविताओं से श्रोताओं को लोट पोट कर दिया। इससे पहले मुख्य अतिथि पूर्व सांसद धनंजय सिंह ने दीप प्रज्ज्वलित करके कार्यक्रम का शुभारंभ किया। संचालन मारूफ देहलवी तथा अध्यक्षता नगर पंचायत अध्यक्ष वसीम अहमद ने किया। कार्यक्रम में अनिल कुमार उपाध्याय, डाक्टर एमएस खान, डॉ. वकील नजीर, मोहम्मद आदिल, डॉ. अनवार अहमद, फिरोज गुड्डू, फारूक आजम आदि लोग मौजूद थे। आयोजक खुर्शीद अनवर खां ने सभी का आभार जताया।