कुंभापुर निवासी ब्रम्हदेव उपाध्याय को आखिरकार न्याय मिल गया। वह 10 वर्ष से वरासत दर्ज कराने के लिए तहसील का चक्कर काट रहे थे। पीड़ित ने अमर उजाला के मेरी आवाज सुनो कालम के तहत अपनी बात रखी। अमर उजाला ने 6 अक्तूबर को पीड़ित की बात को प्रमुखता से प्रकाशित किया। नतीजन जिलाधिकारी डा. दिनेश चंद्र ने प्रकरण को गंभीरता से लिया। इसके बाद शुक्रवार को तहसीलदार योगेंद्र कुमार पांडेय ने तत्काल प्रार्थना पत्र लेकर वरासत दर्ज कर पीड़ित क्षेत्र के कुंभापुर निवासी ब्रह्देव उपाध्याय के घर गए और उन्हें खतौनी दे दिया है। पीड़ित ने बताया कि बदलापुर तहसील में वरासत दर्ज कराने के लिए कई बार एसडीएम के यहां प्रार्थना दिया। एक वर्ष पूर्व मेरे घर एसडीएम व तहसीलदार ने पहुंचकर भौतिक सत्यापन कर लेखपाल को वरासत दर्ज करने के लिए कहें थे। इसके बावजूद आज तक वरासत नहीं दर्ज हुआ था। लेखपाल की लापरवाही के कारण मैं आज तक तहसील का चक्कर लगा रहा था। लेकिन अब मुझे न्याय मिल गया।