जौनपुर। गर्मी शुरू होते ही पेयजल का संकट भी बढ़ गया है। प्रशासन ने इस समस्या से निबटने के कोई इंतजाम नहीं किया। शहर से गांवों तक बहुत से हैंडपंपों ने पानी देना बंद कर दिया है। कई हैंडपंप खराब हो गए हैं तो कई रीबोर के अभाव में शोपीस बने हुए हैं। हैंडपंपों की मरम्मत नहीं कराई गई, जिससे ग्रामीण इलाकों में समस्या गंभीर हो गई है। विभागीय आंकड़ों के मुताबिक जिले की सभी ग्राम पंचायतों में 89 हजार 202 हैंडपंप लगाए गए हैं। इसमें कई हैंडपंप खराब हो चुके हैं तो कई ने पानी देना बंद कर दिया है। वहीं, बहुत से हैंडपंपों से दूषित पानी निकल रहा है। ऐसे में लोगों को शुद्ध पेयजल के लिए भटकना पड़ रहा है। सोमवार को अमर उजाला की टीम ने पड़ताल की तो यह हकीकत सामने आई। बड़ी संख्या में हैंडपंपों की मरम्मत और रीबोर की जरूरत है। सतहरिया के औद्योगिक क्षेत्र स्थित कालोनी में छह हैंडपंप खराब होने से लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ा रहा है। राहगीरों और मजदूरों को गर्मी में पेजल संकट से जूझना पड़ रहा है। सीडा विकास समिति के अध्यक्ष शिवाजी सिंह बताया कि लंबे समय से हैंडपंप खराब हैं। मुफ्तीगंज ब्लाक के 52 गांव में लगभग 3296 हैंडपंप लगे हैं, जिसमें से आधे से ज्यादा खराब हैं। ग्रामीण हैंडपंप रीबोर कराने के लिए ग्राम प्रधान से लेकर सचिव तक से शिकायत कर चुके हैं। बरसठी ब्लाक के ग्राम पंचायत गोठाव व मियांचक बाजार में हैंडपंप में दूषित पानी आने के कारण लोग पेयजल संकट से जूझ रहे हैं।