सतहरिया। देश आजादी का 75वां वर्षगांठ मनाने की तैयारी कर रहा है। अमृत महोत्सव के तहत हर घर में 15 अगस्त को तिरंगा फहराने का अभियान चलाया है। दूसरी तरफ, मुंगराबादशाहपुर ब्लाक मुख्यालय पर स्थित शहीद स्तंभ पर शहीदों और स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों का नाम आधा अधूरा अंकित कर दिया गया है। इससे स्वतंत्रता सेनानियों के परिजनों में काफी आक्रोश है।
इसे लेकर क्षेत्र के लोग भी खफा है। उनका कहना है कि वीर सपूतों ने देश की आजादी के लिए अपने प्राणों की आहुति दे दी थी। आज उन वीर सपूतों का नाम शहीद स्तंभ पर लिखने के लिए जिम्मेदार ध्यान नहीं दे रहे हैं, जो बहुत दु:खद और दुर्भाग्यपूर्ण है। शहीद स्तंभ पर जो भी सेनानियों के नाम और संविधान की प्रस्तावना अंकित है, वह भी अस्पष्ट है। इसके जिम्मेदार अपने राष्ट्रीय कर्तव्य को भूल गए हैं कि शहीदों की बदौलत हम आज खुली हवा में सांस ले रहे हैं। जबकि शहीदों ने भारत मां की खातिर अपने प्राणों की बाजी लगा दी थी। सेनानियों का नाम सिर्फ कोरम पूरा करने तक सिमट कर रह गया है, जो आजादी के मतवालों का अपमान है। स्वतंत्रता संग्राम सेनानी के परिजनों ने शहीद स्तंभ पर नाम न लिखने के लिए कई बार मांग की लेकिन उस पर अमल नहीं किया गया। नीभापुर निवासी अधिवक्ता मदन तिवारी के बाबा बद्रीनाथ तिवारी, पूरेलाल निवासी रमाकांत तिवारी के पिता रूप नारायण तिवारी, नीभापुर निवासी जयप्रकाश तिवारी के पिता गोपीनाथ तिवारी, नीभापुर निवासी जितेंद्र मणि तिवारी के पिता गौरी शंकर तिवारी, सजई निवासी शालिक राम पटेल के पिता भगौती दीन पटेल आदि सेनानियों का नाम शहीद स्तंभ पर अंकित नहीं है। परिजनों ने रोष व्यक्त किया है। इसी तरह क्षेत्र के और भी सेनानियों का नाम छूट गया है। स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के परिजनों ने जिला प्रशासन से शहीद स्तंभ पर सेनानियों का नाम अंकित कराने की मांग की है। बीडीओ सुरेंद्र बहादुर सिंह ने बताया कि जो नाम सेनानियों का लिखने पर मिट गए हैं, उसे फिर से लिखवाया जाएगा।