दरबारे कादरीया गौसपीर के मेले में दरगाह का फाटक गुरुवार की रात खुलते ही हजारों की संख्या में जायरीन ने मन्नते मांगीं। भीड़ को देखते हुए भारी पुलिस फोर्स तैनात की गई थी। गुरुवार की रात 11 बजकर 11 मिनट पर फाटक खुलते
ही जायरीन की भारी भीड़ मस्जिद के अन्दर प्रवेश को बेताब हो उठी। मस्जिद में प्रवेश के लिए मुख्य दरवाजा तथा बाहर निकलने के लिए दो खिड़कियां बनाई गई हंै। इसके बावजूद हजारों की भीड़ की वजह से रात भर धक्का मुक्की
चलती रही। कई प्रान्तों से आने वाले जायरीन मस्जिद के बगल बने तालाब में स्नान कर मस्जिद में मन्नते मांगते हैं। इजरत के विषय में कहावत है कि इजरत शाह मोहम्मद उमर और इजरत शाह नगीन दोनों भाई लगभग एक
हजार वर्ष पूर्व इजारत के लिए बगदाद शरीफ़ गए थे। गौसपीर में रात रुकने के बाद उन्हें स्वप्न में बरसात हुई कि ईंट को इसी जगह एक रौजा की तामीर करके नस्ब कर दिया जाय। ताकि इस जमीन पर बगदाद शरीफ़ की तरह
गौसपुर पाक फ़ैज का चश्मा जारी रहे। यहीं पाक ईंट दरगाह कि गुम्बद के अंदर स्थित एक छोटे से कुब्बे में नस्ब है। जहां जायरीन मत्था टेककर मन्नते मांगते हैं। दरगाह के द्वार से दक्षिण पश्चिम में हजरत शाह मोहम्म्द उमर और
शाह नगीना की मजार बनी है। जहां लोग चादरपोशी करते हंै। दरगाह पर प्रत्येक गुरुवार को अकीदत मंद पहुचते है। 11वीं शरीफ़ के इस सालाना उर्स में दूर दराज से पचास हजार से अधिक लोग यहां पहुचे हैं। अधिकतर लोग कई
बाधाओं से निजात पाने के लिए यहां मत्था टेकने आते हैं। जिसमें महिलाओं की संख्या अपेक्षाकृत अधिक रहती है।