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गुरुकुल परंपरा भारतीय संस्कृति की अमूल्य धरोहर : प्राचार्य

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सुजानगंज -गौरीशंकर संस्कृत महाविद्यालय में गुरू कुल का भव्य शुभारंभ। स्रोत-आचार्य
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श्री गौरी शंकर संस्कृत महाविद्यालय के आवासीय गुरुकुल में नवप्रवेशी बटुकों का दीक्षारंभ संस्कार वैदिक मंत्रोच्चार के बीच संपन्न हुआ। इस अवसर पर नए विद्यार्थियों को सनातन शिक्षा पद्धति, संस्कारों और नैतिक मूल्यों से परिचित कराया गया। महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. विनय कुमार त्रिपाठी ने कहा कि गुरुकुल परंपरा भारतीय संस्कृति की अमूल्य धरोहर है। दीक्षारंभ केवल औपचारिक शिक्षा का प्रारंभ नहीं, बल्कि विद्यार्थी के जीवन में संस्कार, अनुशासन, ज्ञानार्जन और चरित्र निर्माण की पवित्र यात्रा का पहला सोपान है। उन्होंने नवप्रवेशी विद्यार्थियों से वेदों और शास्त्रों के अध्ययन के साथ-साथ नैतिक मूल्यों को जीवन में आत्मसात करने तथा भारतीय संस्कृति के संरक्षण का संकल्प लेने का आह्वान किया। कार्यक्रम में आचार्य विनोद कुमार त्रिपाठी, आचार्य खगेन्द्र मिश्रा, आचार्य संदीप तिवारी, शिवानंद चतुर्वेदी और जितेंद्र सिंह सहित अन्य लोग उपस्थित रहे।
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