जौनपुर। शहर में वायु प्रदूषण मंगलवार की रात खतरनाक स्तर पर पहुंच गया था। एक हफ्ते में जौनपुर देश के सबसे प्रदूषित शहरों में दो बार शुमार हो चुका है जबकि यहां कोई औद्योगिक क्षेत्र भी नहीं है और न ही किसान पराली जला रहे हैं। ऐसे हालात हरियाली नहीं होने, निर्माण कार्य और सड़कों पर वाहनों के दबाव के चलते हैं।
कुछ वर्ष पहले शहर की हवा खराब नहीं थी। तब शहर के इर्द-गिर्द की सड़कों के किनारे खूब पेड़-पौधे थे। शहर के अंदर भी ऐसे तमाम स्थल थे, जहां भरपूर हरियाली थी। हाईवे को फोरलेन में तब्दील करने के लिए सड़क के किनारे पेड़ कटते चले गए। शहर के अंदर भी अनियंत्रित निर्माण के चलते पेड़ काट दिए गए। इस तरह पेड़ कटते गए और उनकी जगह दूसरे नहीं लगाए गए। पार्क और ग्रीन बेल्ट के नाम पर आरक्षित कुछ इलाकों को छोड़ दें तो शहर में कहीं भी हरियाली नजर नहीं आती। वाजिदपुर तिराहे से पॉलीटेक्निक चौराहा होते हुए नईगंज चौराहा तक और जेसीज चौराहा की तरफ लोहिया पार्क को छोड़ दें तो गिनती के पेड़ बचे हैं। चारों तरफ कंक्रीट के जंगल खड़े हो गए हैं। कुछ स्थानों पर लोगों ने घरों के अंदर गमलों में छोटे पौधे लगा रखे हैं, लेकिन इसमें भी सजावटी पौधों की संख्या अधिक है। लगातार हरियाली घटने का असर अब पर्यावरण पर दिखने लगा है।
बुधवार को दोपहर बाद सुधरे हालात
मंगलवार की रात शहर का वायु गुणवत्ता सूचकांक 568 तक पहुंच गया था। रात भर यह खतरनाक स्तर पर बना रहा। सुबह साढ़े 4 से साढ़े 5 बजे तक यह 280 के आसपास आ गया, मगर इसके बाद फिर से वृद्धि शुरू हो गई। सुबह साढ़े 6 बजे 479, साढ़े आठ बजे 528 और साढ़े दस बजे 496 रहा। इसके बाद गिरावट आनी शुरू हुई। दोपहर एक बजे के बाद वायु गुणवत्ता सूचकांक घटकर 200 के नीचे आ गया। अपराह्न तक यह इसी के आसपास बना रहा।
हमने दिया भुगतान, पेड़ लगाए वन विभाग
पीडब्लूडी के एक्सईएन राधाकृष्ण का कहना है कि हाईवे निर्माण के लिए जिले में बहुत कम पेड़ों की कटाई हुई है। जो भी पेड़ काटे गए हैं, उसका भुगतान वन विभाग को कर दिया गया है। वन विभाग की जिम्मेदारी है कि वह उसके एवज में पौधे लगाए। एनएचएआई के प्रोजेक्ट मैनेजर समर बहादुर सिंह का भी कहना है कि जो भी पेड़ काटे गए थे, उसका भुगतान वन विभाग को कर दिया गया है। कितने पेड़ काटे गए और कितना भुगतान किया गया, इसका डाटा फिलहाल उपलब्ध नहीं है। उधर वन विभाग के दावे में जिला लगातार हराभरा होता जा रहा है। प्रभारी डीएफओ जीसी त्रिपाठी ने बताया कि वर्ष 2018 में जौनपुर का वन क्षेत्र 500 हेक्टेयर था, जो अब 550 हेक्टेयर हो गया है। लगातार पौधे लगाए जा रहे हैं।