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Jaunpur News: आचमन योग्य भी नहीं है गोमती का पानी

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जौनपुर। जनपद में पांच नदियां बहती हैं जिसमें पीली, बसुही व वरुणा तो सूख गई हैं। गोमती व सई में पानी कम प्रदूषण ज्यादा है। नदी में कूड़ा-कचरा फेंके जा रहे हैं और नालों का पानी प्रवाहित किया जाता है। जिसके चलते वर्तमान समय में ज्यादा घातक तत्व पाए गए हैं जिनसे आंत, लीवर, कोलाइटिस, अल्सर, किडनी, चर्म और घेघा रोग बढ़ने लगे हैं। पानी भी अपना रंग बदल चुका है। पर्यावरण के जानकार व राज पीजी कालेज के प्राचार्य डा.शंभूराम के नेतृत्व में गोमती नदियों का चार बार नमूना लेकर जल संरक्षण कार्यालय बीएचयू में भेजा गया था। यह जांच रिपोर्ट जनवरी 2022, मई 2022, जून 2022, सितंबर 2022 को भेजा गया था। इसके लिए कुल्हनामऊ, राजेपुर स्थित गोमती सई नदी संगम स्थल, केराकत के बेलांव घाट से नमूना लिया गया। इस टेस्ट में यह बात सामने आई कि जलीय वनस्पतियों का विकास हो रहा है, जो हरे व धानी रंग के है। यह जलीय व परिस्थितिकी तंत्र को खतरा है, ऐसी वनस्पतियों के विकास से जलीय पारिस्थितिकी तंत्र को खतरा है। इससे जल में पाए जाने वाले जीव जंतु संकटग्रस्त हो जाते है अर्थात जल में पाए जाने वाले ऐसे जीव जो जल को शुद्ध करते हैं, वे मरने लगते हैं। यह सूक्ष्म जीवों के स्किन पर प्रभाव डालता है। आर्सेनिक की मात्रा में वृद्धि हो गई है। इसमें यह बात सामने आ रहा है कि गोमती का जल प्रभावित हो रहा है, जल के प्राकृतिक गुण में गिरावट हो रहा है। इससे मछली समेत अन्य जलीय जीव प्रभावित हो रहे हैं।
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बसुही नदी सतत वाहिनी नहीं है। इसमें फरवरी में नहरों में पानी अधिक होने पर टेल से पानी बसुही में पहुंच जाता है। वहीं सई नदी उन्नाव-प्रतापगढ़ से प्रदूषित जल लेकर आती है।

गोमती नदी प्रदूषित हो चुकी है। जांच में यह बात सामने आई है कि इसका जल आचमन योग्य भी नहीं है। जनपद का जलस्तर भी गिरता जा रहा है। सिरकोनी ब्लाक में 35 से 60 फीट व 40 से 80 फीट पर जलस्तर है। जबकि अन्य जगहों पर और भी खराब स्थिति है।
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डा.शंभूराम, प्राचार्य, राज पीजी कालेज
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