जौनपुर। शहर के बीचोबीच गोमती नदी में जमे सिल्ट व गाद के लिए चार से छह दिनाें तक सफाई अभियान चलाया गया। इस दौरान थोड़ा बहुत सिल्ट सफाई का काम भी हुआ। अधिकारियों ने निरीक्षण कर तस्वीरें भी खिंचवाई। मीडिया व सोशल मीडिया पर तस्वीरें प्रचारित कर अपनी पीठ भी थपथपवाई लेकिन अभियान शुरू होते ही बारिश शुरू हो गई। अब सफाई अभियान पूरी तरह से बंद हो गया है। अखबार की तरफ से सई के बाद गोमती की दुर्दशा को उजागर करते हुए अभियान चलाकर खबर लिखी गई थी। इसके बाद 21 से 27 जून तक जिला प्रशासन की तरफ से गोमती में सिल्ट सफाई के लिए जेसीबी मशीन लगाई गई। 7 दिनों तक अभियान चलाया गया। अब वहां न तो कोई कर्मचारी है न कोई मशीन नजर नहीं आती। बारिश के कारण एक बार फिर गोमती में न सिर्फ गंदा पानी भर गया, बल्कि किनारों पर जमा कूड़ा और प्लास्टिक कचरा भी वापस बहकर नदी में आ गया। जहां थोड़ी बहुत सफाई हुई थी, उसका भी असर अब दिख नहीं रहा। सिल्ट और जलकुंभी से गंदगी वैसे बनी हुई है। नदी किनारे बसे मोहल्लों के लोग दुर्गंध और मच्छरों से परेशान हैं। जनता की उम्मीदें एक बार फिर टूट गई हैं। अब देखना है कि क्या प्रशासन अगले कदम उठाएगा या यह अभियान भी बाकी कागजी योजनाओं की तरह ठंडे बस्ते में चला जाएगा।
स्थानीय निवासी बोले :- प्रशासन के लोग दो-तीन दिन आए, फोटो खिंचवाई, और चले गए। गंदगी अब भी जस की तस है। इससे तो बेहतर होता कि स्थायी समाधान की दिशा में काम होता।- पवन गुप्ता, ईशापुर।
पर्यावरणविद ने जताई चिंता :-गोमती हमारी जीवनरेखा है। हर साल ऐसे दिखावे के अभियान चलाकर असल समस्या को नजरअंदाज किया जा रहा है। जब तक ठोस प्लानिंग और निरंतर निगरानी नहीं होगी, तब तक गोमती की हालत नहीं सुधरेगी।- गौतम गुप्ता, अध्यक्ष, स्वच्छ गोमती अभियान।
21 जून से 27 जून तक सिल्ट सफाई का अभियान चलाया गया। बारिश का पानी बढ़ने के कारण इसको रोक दिया गया है। नदी किनारे बोरी में बंधी मिट्टी को न हटाने के लिए सिंचाई विभाग ने कहा है। एक तरफ का काफी सिल्ट साफ किया गया, दूसरे तरफ का काम बाकी है।
- पवन कुमार, अधिशासी अधिकारी, नगर पालिका परिषद जौनपुर।