बारिश शुरू होते ही नदियों का जल स्तर बढ़ने लगा है। बारिश के कारण अब तक गोमती नदी का जल स्तर 6 फीट बढ़ गया। हालांकि जलस्तर अभी खतरे के निशान से 29 फीट नीचे है। वहीं, प्रशासन हर साल की तरह इस बार भी बाढ़ से निपटने की तैयारियां पूरी करने का दावा कर रहा है। ताकि, बाढ़ जैसी स्थिति पैदा होने पर लोगों को राहत पहुंचाई जा सके।
गोमती, सई, पीली, बसुई व वरुणा नदियां जिले से होकर गुजरी हैं। जो विभिन्न इलाकों से होते हुए अन्य आसपास के जनपदों की तरफ आगे गई हैं। बारिश के दिनों में इन नदियों का जल स्तर बढ़ जाता है। इससे नदी के आसपास निचले इलाकों में बसे गांवों में बाढ़ का खतरा मंडराने लगता है। पांच नदियों में अगर बाढ़ आई तो तकरीबन 6,326 हेक्टेयर क्षेत्रफल अर्थात 144 से अधिक गांवों को प्रभावित करेगा। वर्ष 1980 में आई विनाशकारी बाढ़ में करीब इतना ही क्षेत्रफल प्रभावित हुआ था, जिसे आज भी लक्ष्य मानकर बाढ़ से निपटने की तैयारी प्रशासन करता है। बाढ़ से राहत पहुंचाने के लिए इस बार जिले में 47 गोताखोरों व 127 नाविकों की तैनात की गई है। बाढ़ चौकियां बनाने के लिए 88 स्थानों का चयन किया गया है। ताकि बाढ़ आने पर प्रभावित इलाकों के लोगों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया जा सके।
तहसील बाढ़ चौकी गोताखोर नाविक
सदर - 20 12 56
मछलीशहर 12 4 11
मड़ियाहूं 13 11 13
बदलापुर 12 12 15
केराकत 7 3 25
शाहगंज 24 5 7
बाढ़ से निबटने की तैयारी पूरी कर ली गई है। संबंधित अधिकारियों दिशा-निर्देश भी दिए जा चुके है। बाढ़ प्रभावित गांवों व गोताखोरों का भी चयन कर लिया गया है।-राम प्रकाश, एडीएम