जौनपुर। विवाह मैरेज लॉन में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के अंतिम दिन कथाव्यास पं. रजनीकांत द्विवेदी ने भगवान की भक्ति, संतोष और सच्ची मित्रता का महत्व बताया। उन्होंने कहा कि अभिमान और लोभ का त्याग करने वाले व्यक्ति पर प्रभु की कृपा बनी रहती है। इच्छाओं के पीछे भागने के बजाय मनुष्य को संतोष और विश्वास के साथ जीवन जीना चाहिए। उन्होंने कहा कि कलियुग की विडंबना है कि लोग अपने दुखों से अधिक दूसरों के सुख और प्रगति को देखकर दुखी होते हैं। ईर्ष्या मनुष्य की मानसिक शांति छीन लेती है। जिसकी नीयत साफ होती है, भगवान स्वयं उसका सहारा बनते हैं। इसलिए व्यक्ति को अपने कर्म, व्यवहार और विचारों की शुद्धता बनाए रखनी चाहिए। कथाव्यास ने भगवान श्रीकृष्ण और सुदामा की मित्रता का भावपूर्ण वर्णन करते हुए कहा कि सच्ची मित्रता धन-दौलत की मोहताज नहीं होती। सुदामा निर्धन होने के बावजूद अपने बालसखा श्रीकृष्ण से मिलने द्वारका पहुंचे। भगवान ने उनका आत्मीय स्वागत कर उन्हें सम्मान दिया। यह प्रसंग प्रेम, विश्वास और आत्मीयता का संदेश देता है। उन्होंने श्रद्धालुओं से अहंकार, लोभ और ईर्ष्या त्यागकर भक्ति, प्रेम और सद्भाव का मार्ग अपनाने की अपील की। कथा की मुख्य यजमान विमला सेठ रहीं। इस दौरान भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष पुष्पराज सिंह, विवेक सेठ, विनीत सेठ, अर्चना सेठ, विशाल सेठ, विपिन सेठ, हर्षित सेठ, हार्दिक सेठ आदि रहे।