सवाल : हरियाणा पीसीएस में चयन के बाद कैसा महसूस हो रहा है?
जवाब : बहुत खुशी हो रही है। माधोपट्टी गांव में नौ साल से किसी आईएएस या पीसीएस अधिकारी का चयन नहीं हुआ था। यह जानकर मैं भी दुखी थी। मार्च में अमर उजाला की टीम गांव आई थी। संयोग से मैं भी उस समय घर आई हुई थी। बातचीत के दौरान मैंने बताया था कि यूपीएससी की प्रारंभिक परीक्षा उत्तीर्ण कर ली हूं। मैंने कहा था कि कुछ महीने बाद जब आप दोबारा गांव आएंगे तो चयन की नई खबर मिल सकती है। अगले दिन दिल्ली पहुंची तो मां ने अखबार की कटिंग भेजी। खबर पढ़कर दुख भी हुआ, लेकिन मैंने इसे चुनौती के रूप में लिया और तैयारी में जुट गई। आज उसका परिणाम सामने है।
सवाल : आपने अपनी पूरी पढ़ाई कहां से की?
जवाब : मेरी पूरी पढ़ाई पंजाब में हुई है। मैंने 12वीं की परीक्षा 95 प्रतिशत अंकों के साथ उत्तीर्ण की। इसके बाद चंडीगढ़ विश्वविद्यालय से अर्थशास्त्र में बीए और एमए किया। एमए में टॉपर रही और एलएलबी में स्वर्ण पदक हासिल किया।
सवाल : आपके परिवार में कौन-कौन हैं?
जवाब : पिता नवीन सिंह पंजाब पुलिस में एएसआई थे। अब वह सेवानिवृत्त हो चुके हैं। मां कल्याणी सिंह गृहिणी हैं और माधोपट्टी गांव में ही रहती हैं। भाई नवनीत सिंह नैनी में एक कंपनी में लीड मैनेजर हैं।
सवाल : माता-पिता ने आपके सपनों को पूरा करने में किस तरह साथ दिया?
जवाब : मैं परिवार की लाड़ली रही हूं। भाई को डांट पड़ जाती थी, लेकिन मुझे नहीं। पापा हमेशा कहते थे कि बेटी का जो सपना है, उसे वही पूरा करे। उनकी सोच रूढ़िवादी नहीं थी। उन्होंने मुझे पूरा प्यार दिया और अपनी पसंद का रास्ता चुनने की आजादी दी। मां मुझे कभी रसोई में नहीं जाने देती थीं। परिवार ने हमेशा मेरी पढ़ाई और लक्ष्य को प्राथमिकता दी।
सवाल : आपके के तैयारी का तरीका क्या था?
जवाब : मैं रोजाना करीब आठ घंटे पढ़ाई करती थी। मेरा मानना है कि पढ़ाई के घंटों से ज्यादा जरूरी एकाग्रता है। जितनी भी पढ़ाई करें, पूरे मन से करें। पढ़ते समय ध्यान उसी पर होना चाहिए। एकाग्रता के साथ की गई पढ़ाई ज्यादा उपयोगी होती है।
सवाल : आपकी तैयारी में इंटरनेट और चैटजीपीटी का कितना योगदान रहा?
जवाब : मैंने बिना कोचिंग के तैयारी की। किताबों और नोट्स के अलावा गूगल और चैटजीपीटी का भरपूर इस्तेमाल किया। करेंट अफेयर्स और विषयों को समझने में इनसे काफी मदद मिली। हालांकि, चैटजीपीटी पर कई बार गलत जानकारी भी मिल जाती है। इसलिए उससे मिली जानकारी को दूसरे विश्वसनीय स्रोतों से क्रॉस चेक करना जरूरी है। इंटरनेट और तकनीक तैयारी में मददगार हैं, लेकिन उन पर आंख मूंदकर भरोसा नहीं करना चाहिए।
सवाल : क्या आपको भी असफलता का सामना करना पड़ा? उससे कैसे उबरीं?
जवाब : हां, मैंने यूपीएससी में दो बार असफलता का सामना किया। पिछली बार 1.33 अंक कम होने के कारण निराशा हाथ लगी थी। उस समय मैं काफी रोई थी। एक समय दूसरे विकल्पों के बारे में सोचने लगी थी, लेकिन परिवार ने मेरा हौसला बढ़ाया और साथ दिया। इसके बाद मैंने फिर से तैयारी शुरू की। आज हरियाणा पीसीएस में चयन के रूप में उसका परिणाम सामने है। असफलता से निराशा होती है, लेकिन परिवार का साथ और खुद पर भरोसा हो तो आगे बढ़ने की हिम्मत मिलती है।
सवाल : सफलता के इस पल में क्या किसी की कमी सबसे ज्यादा महसूस हो रही है?
जवाब : हां, अपनी दादी दिवंगत मीरा सिंह की बहुत याद आ रही हूं। दादी बचपन से ही मुझे अफसर बिटिया बनाना चाहती थीं। कहती थीं कि जब मुस्कान अफसर बनेगी तो पूरे गांव में मिठाई बांटकर जश्न मनाऊंगी। वर्ष 2020 में कोविड काल के दौरान उनका निधन हो गया। आज वह हमारे बीच होतीं तो बहुत खुश होतीं। मेरी सफलता के इस पल में उनकी कमी सबसे ज्यादा महसूस हो रही है।
सवाल : क्या आपको लगता है कि आपकी मंजिल मिल गई है?
जवाब : नहीं, अभी तो एक पड़ाव मिला है, मंजिल बाकी है। मेरा लक्ष्य आईएएस बनना है। मैं यूपीएससी की मुख्य परीक्षा की तैयारी कर रही हूं। हरियाणा पीसीएस में चयन से मेरा आत्मविश्वास बढ़ा है, लेकिन अभी अपने लक्ष्य को हासिल करने के लिए और मेहनत करनी है।
सवाल : प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं को क्या संदेश देना चाहेंगी?
जवाब : मैं देखती हूं कि लाइब्रेरी में पढ़ने आने वाले कुछ युवा पढ़ाई के दौरान भी मोबाइल चलाते रहते हैं। ऐसा बिल्कुल नहीं करना चाहिए। जितनी देर पढ़ाई करें, पूरे मन से करें। इंटरनेट और चैटजीपीटी जैसे साधनों की मदद लें, लेकिन उनसे मिलने वाली जानकारी को क्रॉस चेक जरूर करें, क्योंकि उनमें गलतियां भी हो सकती हैं। असफलता से घबराने के बजाय अपनी कमियों को पहचानें और लगातार प्रयास करते रहें।