नेहरू बाल उद्यान इंटर कालेज वन विहार रोड़ के टापर्स विद्यार्थी। स्कूल प्रशासन
जौनपुर। यूपी बोर्ड का परीक्षाफल घोषित हुआ है। हाईस्कूल का परिणाम 90.7 प्रतिशत और इंटर का परिणाम 74.47 प्रतिशत रहा। जानकारों का कहना है कि परीक्षा में कम अंक मिलने का आशय कॅरिअर पर ब्रेक नहीं है। बीएचयू वाराणासी के वरिष्ठ मनोवैज्ञानिक प्रो. आरएन सिंह का कहना है कि वैसे तो परीक्षा में अच्छे अंक प्राप्त करने की आकांक्षा हर बच्चे में होती है, और होनी भी चाहिए। ऐसी ही इच्छा बच्चों के अभिभावकों की भी होती है। इसमें कोई बुराई नहीं है। परंतु कभी-कभी दुर्भाग्य से कुछ बच्चों को उतने अंक नहीं मिल पाते, जितनी उनकी कामना होती है। ऐसे बच्चों में चिंता, निराशा या तनाव का भाव उत्पन्न हो सकता है। परंतु, यह किसी भी दृष्टि से उचित नहीं है, क्योंकि जो हो चुका है, उसको लेकर उलझना किसी भी तरह से उचित नहीं है, क्योंकि इसका उनके शारीरिक और मानसिक दोनों ही प्रकार के स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। कम अंक पाना इस बात का बात का संकेत नहीं होता कि बच्चे ने परिश्रम नहीं किया या कॉपियों के मूल्यांकन में कोई लापरवाही हुई होगी। वास्तविकता यह है कि कभी-कभी बच्चे की तैयारी और प्रश्न पत्र के स्वरूप तथा प्रकार में समानता कम हो जाती है। इससे अंकों का कम होना स्वाभाविक है। परंतु इसका इसका मतलब यह नहीं है कि आगे उनका भविष्य अच्छा नहीं रहेगा। कोई एक परीक्षाफल पूरी जिंदगी का भविष्य नहीं तय कर सकता। जिन बच्चों को कम अंक दुर्भाग्य से प्राप्त हुए हैं, उन्हें अपने धैर्य और विवेक के साथ भविष्य में सफलता का निश्चय करना चाहिए। इसमें अभिभावकों और शिक्षकों को भी बहुत ही महत्वपूर्ण भूमिका निभानी होगी। दुनिया में ऐसे अनेक उदाहरण मिलते हैं, जिन्हें अंक कम मिले, परंतु वे सफलता के शीर्ष पर पहुंच गए। बच्चों को ऐसे व्यक्तित्व से प्रेरणा लेनी चाहिए और नवीन निश्चय के साथ आगे बढ़ना चाहिए।