गोमती नदी पर बने पुल के िकनारे विकसित होंगे घाट।
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पर्यटन को बढ़ावा देने की गरज से शहर में गोमती नदी के घाटों को वाराणसी के गंगा नदी के घाटों की तर्ज पर विकसित किया जाएगा। इसका प्रस्ताव तैयार करने के लिए नगर विकास राज्यमंत्री गिरीश यादव ने मंगलवार को अधिकारियों को निर्देश दिया है। प्रस्ताव तैयार होने के बाद इसे वह मुख्यमंत्री को भेजेंगे। आधा किमी बनने वाले घाटों के विकास पर 100 करोड़ रुपये का खर्च आएगा।
आदि गंगा गोमती का शांतिमय तट तपस्वी, ऋषियों के चिंतन एवं मनन का एक प्रमुख पुण्य स्थल के रूप में माना जाता है। जहां से वेदमंत्रों के स्वर एवं देववाणियां गूंजती थी। गोमती एवं सई नदियां जिले की अनवरत बहने वाली नदियां है। वैसे तो इसके अलावा बसुही, वरूणा, पीली, मामुर एवं गांगी यहां की छोटी नदियां है। गोमती नदी शहर के बीचो-बीच से निकल कर गाजीपुर जिले में गंगा नदी में मिल जाती है। गोमती नदी पर शहर में तीन पुल बने है। इसमें ऐतिहासिक शाही पुल पूरे देश का एक अनूठा पुल हैं जिसका निर्माण 1564 में अकबर के शासनकाल में हुआ था।
गोमती नदी के घाटों पर कब्जा हो रहा है। ऐसे में गोमती नदी को पर्यटन के रूप में विकसित कराने के लिए राज्यमंत्री गिरीश चंद्र यादव ने शाही पुल से लेकर सदभावना एवं शास्त्री पुल तक नदी के दोनों किनारे घाट को पक्का बनाएं जाने का खाका तैयार करा रहे है।
सूत्रों की मानें तो मुख्यमंत्री महंत आदित्यनाथ योगीने भी इसके लिए हरी झंडी दे दी है। इस पर तकरीबन 100 करोड़ का खर्च होने का अनुमान है। जिसमें नदी की साफ-सफाई, दोनों तरफ घाटों का निर्माण, वाहनों के लिए पार्किग एवं नदी में बाहर से बहने वाले पानी के लिए ट्रीटमेंट प्लांट लगाएं जाने की योजना है।