जौनपुर। शहर या आसपास के क्षेत्रों में किसी की मौत होने पर शव का अंतिम संस्कार रामघाट पर करने की परंपरा रही है। कोरोना काल में इस घाट पर भीड़ बढ़ी तो अब कई नए घाट भी ढूंढ लिए गए हैं। नदी के किनारे स्थित गांवों के बाहर ही लोग शव जला रहे हैं। सई और गोमती के तटों पर आधा दर्जन से अधिक नए स्थानों पर शव जलाए जा रहे हैं।
सामान्य दिनों में रामघाट पर 30 से 35 शव जलाए जाते हैं। कोरोना काल में यह संख्या अचानक दोगुनी से ढाई गुनी तक पहुंच गई है। शव जलाने के लिए लोगों को नंबर का भी इंतजार करना पड़ रहा है। इसके चलते भीड़ भी लग रही है। घाट किनारे दुर्व्यवस्था और भीड़ से बचने के लिए अब नदी के तट पर नए स्थान ढूंढ लिए गए हैं। शहर के बसीरपुर में भी यदा-कदा शव का अंतिम संस्कार होता था। पिछले कुछ दिनों से यहां भी नियमित अंतिम संस्कार हो रहा है। मंगलवार को ही दोपहर में दो शव जल रहे थे। सिविल लाइंस निवासी संजय, राहुल आदि ने बताया कि एक पखवाड़ा से यहां नियमित दाह संस्कार हो रहा है, जबकि पहले साल-दो साल में कोई शव जलता था। शहर से सटे रामदयालगंज में सई नदी और बरगुदर पुल के पास भी सई नदी के तट पर शवों का अंतिम संस्कार करने वालों की संख्या बढ़ी है। खुटहन के पिलकिछा घाट के अलावा भी आसपास के गांवों में गोमती के तट पर शव जलाए जा रहे हैं।