फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

पूर्व मंत्री अहमद हसन का निधन: मोहम्मद हसन पीजी कॉलेज के प्राचार्य डॉ. अब्दुल कादिर के थे करीबी, सीएमओ की पत्नी के इमरती लाने पर हो गए थे नाराज

Sat, 19 Feb 2022 03:18 PM IST
उत्पल कांत अमर उजाला नेटवर्क, जौनपुर

सार

स्वास्थ्य खराब होने के कारण लखनऊ के डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल में भर्ती कराया था। उनके निधन पर जौनपुर का मोहम्मद हसन विद्यालय परिवार भी शोक में डूब गया।
विज्ञापन
पूर्व मंत्री अहमद हसन का मोहम्मद हसन पीजी कॉलेज से भी गहरा लगाव था। - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

समाजवादी पार्टी के नेता, पूर्व मंत्री व विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष अहमद हसन (88) का शनिवार को निधन हो गया। सपा सरकार में वह स्वास्थ्य व शिक्षा मंत्री भी रहे थे। उनका जौनपुर से गहरा नाता रहा है। शहर में उनकी कई रिश्तेदारी थीं। मोहम्मद हसन कॉलेज के भवनों को बनवाने में उनका बड़ा योगदान रहा है।

विज्ञापन


अहमद हसन अंबेडकरनगर के जलालपुर के मूल निवासी थे। उनके करीबियों में मोहम्मद हसन पीजी कॉलेज के प्राचार्य डॉ. अब्दुल कादिर थे। वह उनके इतने करीबी थे कि परिवार से पहले उनसे अपनी बातें साझा करते थे। डॉ. अब्दुल कादिर बताते हैं कि साल 1994 में अहमद हसन गोरखपुर से डीआईजी के पद से सेवानिवृत्त हुए तो राजनीति में आए थे।

तत्कालीन समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मुलामय सिंह यादव ने अपनी सरकार में उन्हें अल्पसंख्यक आयोग का चेयमैन बनाया था। उस समय के स्मरण को याद करते हुए डॉ. अब्दुल कादिर बताते हैं कि मैं लखनऊ गया था, तब मैं उनसे मिलने के लिए उनके आवास पर गया था। वो दोपहर का लंच कर रहे थे और मुझे भी अपने साथ बैठा लिए थे।

इसके बाद धीरे-धीरे मैं उनके करीब आता गया। मेरे अनुरोध पर वह 1995 में मोहम्मद हसन डिग्री कॉलेज आए। उनका कॉलेज से इतना लगाव हो गया था कि कुछ लोग मोहम्मद हसन डिग्री कॉलेज की जगह अहमद हसन कॉलेज कहते थे। वह तत्कालीन रक्षामंत्री मुलायम सिंह यादव को मोहम्मद हसन पीजी कॉलेज ले आए थे।

मुलायम सिंह ने उस समय एक फाउंडेशन से 20 लाख रुपये भवन बनाने के लिए दिलवाया था। इसके बाद अहमद हसन ने अपनी निधि और सहयोगियों से भी कॉलेज के भवनों को बनवाने में मदद करवाई थी। वह करीब दस कॉलेज बार आ चुके हैं। उनकी गाड़ी से कभी बत्ती नहीं उतरी, उनकी ईमानदारी के कारण पक्ष-विपक्ष सभी लोग सम्मान करते थे।


पुरानी यादों को साझा करते हुए उन्होंने बताया कि जब अहमद हसन मंत्री थे, तब मैंने परेशान चल रहे एक परिचित सीएमओ का तबादला सोनभद्र करने का आग्रह किया था। जिसपर उन्होंने कर दिया था, लेकिन सीएमओ की पत्नी जौनपुर की इमरती लेकर उनके घर पहुंच गई थीं। जिसे देखकर वह काफी नाराज हो गए थे और उन्हें घर से वापस भेज दिया था।

इसके बाद मुझसे फोन कर बोले थे कि मेरे घर इमरती सिर्फ एक ही आदमी लेकर आ सकता है वह भी अब्दुल कादिर। वह दिन मुझे आज भी याद है। जब भी उनकी तबीयत गड़बड़ होती थी तो वह मुझसे जरूर साझा करते थे। चार माह पहले मैं उसे मिलने गया था, तब वो हाथ में चाय लेकर आए थे। मगर, एक माह पहले ही वह अपने घर में चलते-चलते बैठ गए थे।

इसपर उन्हें अस्पताल भर्ती कराया गया था। जहां डॉक्टरों ने उन्हें पेस मेकर लगाया था। मैं उनके बीमार होने की खबर सुनकर पहुंचा तो परिवार के लोग उन्हें मेरा नाम बताए, जिसपर वह नाम सुनकर बैठने की कोशिश करने लगे थे। वह पल देखकर मैं भावुक हो गया था। उनसे मिलने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी गए थे।
विज्ञापन

पूर्व सीएम अखिलेश यादव भी हमेशा उनका सम्मान करते थे। स्वास्थ्य खराब होने के कारण लखनऊ के डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल में भर्ती कराया था। रात में ही मुझे उनके परिवार के लोगों ने बताया कि तबियत खराब हो रही है, इसपर मैं सुबह उन्हें देखने जाने की तैयारी में था लेकिन सुबह पता लगा कि इनका इंतकाल हो गया। उनके निधन पर मोहम्मद हसन विद्यालय परिवार भी शोक में डूब गया और शोक में विद्यालय बंद रहा।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें