जौनपुर। नगर में चल रही अमृत योजना अपनी खामियों के चलते परेशानी का सबब बन गई है। सीवर लाइन का काम तेजी से भले ही कराने का दावा किया जा रहा हो लेकिन जमीनी हकीकत पूरी तरह से चौपट है। जिन जगहों पर योजना का काम किया गया है, उसको वैसे ही खोदकर छोड़ दिया गया है। पाइप लाइन डाल कर छोड़ देने से सड़कें टूट गई हैं। इसमें गिर कर राहगीर घायल हो रहे हैं। प्रमुख स्थानों में सहकारी काॅलोनी, नईगंज से ओलंदगंज मार्ग, कचहरी मार्ग, रुहट्टा से पाॅलिटेक्निक मार्ग की स्थिति गड़बड़ है। नगर विकास विभाग की ओर से नगर पालिका परिषद जौनपुर में अक्तूबर 2019 से सीवर लाइन का कार्य चल रहा है। कार्यदायी संस्था फर्म टेक्नोक्राफ्ट कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड नोएडा के तहत काम चल रहा है। इसके तहत 264 करोड़ की परियोजना में 179 किमी सीवर पाइप लाइन बिछाई जानी है, इसमें से अभी तक 152 किमी पाइप लाइन बिछाई जा चुकी है। इस काम को पहले मार्च 2024 तक पूरा करना था। अभी तक सरकारी दावों के अनुसार 73 फीसदी काम हो चुका है। इन पांच सालों के दौरान सड़कें पूरी तरह से गड्ढों में तब्दील होती रही। जिन मार्गों में सीवर लाइन की पाइप डाली गई, अधिकतर जगहों पर चार पहिया वाहन मात्र के गुजरने से सड़कें धंस जा रही हैं। इससे कार्य की गुणवत्ता का स्वयं ही अंदाजा लगाया जा सकता है। शहर में लोगों को घंटों जाम का सामना करना पड़ रहा है।
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पहले भी लग चुका है 83 लाख का जुर्माना
सीवर लाइन की खराब प्रगति पर पहले 62 हजार रुपये प्रतिदिन के हिसाब से कंपनी पर जुर्माना लगाया गया था। इसे दिसंबर 2021 तक 40 फीसदी काम पूरा करना था। ऐसा न होने पर कंपनी पर जुर्माना लगा था। बाद में वसूली के बाद हटा दिया गया। 20 नवंबर 2022 को फिर नोटिस देकर जुर्माना लगाया गया। दोनों मिलाकर 83 लाख रुपये का जुर्माना लग चुका है।
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तीन बार हुआ मुकदमा
दो साल पहले तत्कालीन अधिशासी अभियंता संजय गुप्ता ने धीमी गति और आवागमन प्रभावित होने पर कार्यदायी फर्म पर मुकदमा दर्ज कराया था। अभी अक्तूबर 2023 में नवरात्र से पहले भी लाइन बाजार थाने में मनीष कुमार वर्मा के निर्देश पर लापरवाही पर संस्था मुकदमा दर्ज किया गया था। अहमद खां मंडी में दिसंबर 2023 में कार्य के दौरान मजदूर की मौत पर भी फर्म पर मुकदमा दर्ज किया गया।
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कोट
मार्च 2024 तक कार्य पूरा करना था, लेकिन अभी 73 फीसदी ही काम हो सका है। ऐसे में निर्धारित समय पर काम न होने पर कई बार पत्र और मुकदमा दर्ज कराया गया। शेष कार्य दिसंबर तक पूरा करने की समय सीमा की गई है। सड़कें अगर टूटती हैं, तो उसकी फिर से मरम्मत कराई जाएगी।
-रविंद्र कुमार मांदड़, डीएम, गाजीपुर