जौनपुर। बगैर मानकों को पूर्ण किए स्कूली वाहनों का संचालन धड़ल्ले से किया जा रहा है। स्कूलों की छुट्टी होने पर इसे आराम से देखा जा सकता है कि किस तरह से नियमों की धज्जियां उड़ायी जा रही हैं। यहीं वजह है कि बीच-बीच में स्कूली वाहनों से हादसा हो जाता है। सोमवार को बदायुं में हुए हादसे की खबर सुनकर लोगों को जिले में होने वाली मनमानी याद आ गई।
करीब 10 माह पहले दिसंबर में जिले के रामपुर ब्लाॅक स्थित श्रीमती कांती देवी जनता विद्यालय से कुछ बच्चों को लेकर एक बस मनगढ़ जा रही थी। प्रयागराज के भैसकी गांव के पास पलटने से दो छात्रों की मौत हो गई थी। दोनों जौनपुर के ही रहने वाले थे। जांच में पता चला कि 40 की सीट वाली बस में 80 से अधिक छात्रों को बैठाया गया था।
ओवरलोडिंग की वजह से ही बीते एक महीने पहले पंवारा थाना क्षेत्र के भटेवरा गांव में जिस ऑटो से छात्र स्कूल से लौट रहा था उसी से गिरा और उसकी चपेट में आकर मौत गई। उसमें भी पता चला कि 15 से अधिक बच्चे बैठाए गए थे। यह तो ओवरलोडिंग के नमूने मात्र हैं। परिवहन विभाग के आंकड़ों में 157 स्कूली वाहन ऐसे हैं जिनका फिटनेस फेल हो चुका है। उन्हें नोटिस भेजा गया है।
कोट
जिले में 517 स्कूली वाहन पंजीकृत हैं जिसमें से 157 का फिटनेस फेल है। स्कूलों के संचालकों को नोटिस भेजा गया है। इसके बावजूद जो लोग फिटनेस नहीं करा रहे अब उनका पंजीयन निलंबित करने की कार्रवाई की जाएगी। -रमेश चंद्र श्रीवास्तव, एआरटीओ प्रशासन