आईआईएम लखनऊ के प्रो. प्रकाश सिंह ने कहा कि आज विद्यार्थियों को किताबी दुनिया के साथ-साथ व्यवहारिक जगत में भी तालमेल बैठाने की जरूरत है।
अपना ध्यान विषय एवं उसकी अवधारणा को समझने में लगानी चाहिए। रटा-रटाया फार्मूला आगे चलकर कई दिक्कतें लाता है। आप जो कुछ भी अपनी पुस्तकों में पढ़ रहे हैं उसे अपने जीवन में भी लागू करें।
तेजी से बदलते सामाजिक परिवेश और सूचना प्रौद्योगिकी ने हमारी लिखने और पढ़ने दोनों की क्षमता को प्रभावित किया है। वह वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय के संगोष्ठी भवन में प्रबंध अध्ययन संकाय, विज्ञान संकाय एवं सामाजिक विज्ञान
संकाय के नवागत पीजी विद्यार्थियों के लिए कैरियर काउंसलिंग एंड ओरिएंटेशन प्रोग्राम में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि हम अध्यापकों और विद्यार्थियों का यह महत्वपूर्ण दायित्व है कि पढ़ने व लिखने दोनों की क्षमता का उत्तरोत्तर विकास करें।
विद्या विनय देती है। अत: हम अपने अध्ययन और सेवा काल के दौरान विनम्रता को प्राथमिकता दें। आप इस विश्वविद्यालय के ब्रांड एंबेसडर हैं। इस विश्वविद्यालय के पताका को आपको ही आगे ले जाना है। वित्त अधिकारी एमके सिंह ने कहा कि विद्यार्थी
जीवन में कुछ प्रेरक घटनाएं जीवन को सही राह की ओर ले जाती है। इससे पहले प्रो. प्रकाश सिंह एवं वित्त अधिकारी एमके सिंह ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। इस अवसर पर डा. मानस पाण्डेय एवं डा. अजय प्रताप सिंह ने मुख्य अतिथि एवं कार्यक्रम अध्यक्ष को श्रीफल, स्मृति चिन्ह एवं शाल भेंटकर सम्मानित किया।