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लखनऊ व वाराणसी के लिए चल रहीं कम बसें

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स्थानीय रोडवेज डिपो की 15 बसों के एक साल से निदेशालय में सरेंडर रहने से लखनऊ व वाराणसी जाने वाले यात्रियों को आवागमन में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। बसों के सरेंडर रहने से इन मार्गों पर काफी कम बसों का संचालन किया जा रहा है। जिससे समय से यात्रियों को बसें नहीं मिल पा रही हैं। वहीं, बसों में भारी भीड़ भी हो रही है।
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जौनपुर रोडवेज डिपो से कुल 85 बसों का संचालन किया जा रहा था। जिसमें 82 बसें परिवहन निगम और तीन अनुबंधित बसें चल रही थीं। उस दौरान रोडवेज को प्रतिदिन आठ से नौ लाख रुपये की इनकम होती थी। वहीं, 10 हजार यात्री भी रोज बसों से आवागमन कर रहे थे, लेकिन पिछले साल कोरोना के कारण हुए लॉकडाडन के दौरान रोडवेज डिपो से 22 बसों को निदेशालय सरेंडर कर दिया गया था। एक साल बाद भी अभी तक 15 बसें निदेशालय में ही सरेंडर हैं। जिससे इस समय डिपो से सिर्फ 72 बसों का संचालन हो रहा है। इससे रोज मात्र छह हजार यात्री ही यात्रा कर रहे हैं। बसों के सरेंडर रहने से सबसे अधिक लखनऊ व वाराणसी जाने वाले यात्रियों को दिक्कत हो रही है। कारण, इन मार्गों पर रोडवेज बसों का संचालन कम हो रहा है।
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वर्जन...
- सरेंडर बसों को रिलीज करने के लिए निदेशालय को पत्र भेजा गया हैं। शीघ्र ही बसें आ जाएंगी। बसों के सरेंडर रहने से लखनऊ व वाराणसी के लिए कम बसों का संचालन किया जा रहा है। वहीं, डिपो को प्रतिदिन एक से दो लाख रुपये का घाटा हो रहा है। - अनिल श्रीवास्तव, केंद्र प्रभारी रोडवेज।
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