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लौह मिश्रण धातुओं का प्रयोग अधिक

Wed, 21 Jan 2015 11:58 PM IST
ब्यूरो, अमर उजाला, जौनपुर
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आईआईटी बीएचयू के प्रो. एसपी तिवारी ने कहा कि निर्माण में लौह और लौह मिश्र धातुओं का सबसे अधिक उपयोग होगा है। विशेष रुप से बड़े पुल, इमारत, विमान, रेलवे ट्रैक के निर्माण की गुणवत्ता वेल्डिंग प्रक्रिया से जुड़ी है। इसमें आर्क और गैस वेल्डिंग के अतिरिक्त आधुनिक वेल्डिंग प्रक्रियाओं का प्रयोग हो रहा है। बुधवार को विश्वविद्यालय के मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग में वेल्डिंग ऑफ फेरस एंड नान फेरस मेटल एंड एलाय विषय पर आयोजित विशेषज्ञ व्याख्यान माला में बोल रहे थे।
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उन्होंने कहा कि बड़े टैंकों, जलयान, स्पेस सटल के निर्माण में सूक्ष्म वेल्डिंग प्रक्रिया का प्रयोग किया जाता है। फ्यूजर वेल्ंिडग में जोड़े जाने वाले दोनाें भागों को पिघलाना आवश्यक होता है। जबकि सालिड स्टेट वेल्डिंग में वेश मैटेरियल का बिना पिघलाए ही वेल्ंिडग की जा सकती है। इलेक्ट्रान बीम वेल्ंिडग में इलेक्ट्रान की गतिज ऊर्जा का प्रयोग ऊष्मा उत्पन्न करने के लिए किया जाता है।

इससे पहले मुख्य अतिथि ने सरस्वती के चित्र पर पुष्प अर्पित कर कार्यक्रम की शुरूआत की। संकाय अध्यक्ष प्रो. वीवी तिवारी, डा. एके श्रीवास्तव, प्रो. वीके सिंह ने विचार व्यक्त किया। कार्यक्रम में डा. दीप प्रकाश सिंह, डा. रजनीश भास्कर, डा. अपर्णा सिंह, डा. ऋषिकेश, डा. प्रमोद, डा. सुरजीत यादव, डा. अरविंद कुमार, डा. राजेश कुमार आदि मौजूद थे।
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