जौनपुर। कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय की फर्जी तरीके से नियुक्त अध्यापिका प्रीति और राजकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय डिहिया की दीप्ति के खिलाफ केस दर्ज कर कोतवाली पुलिस चुप बैठ गई। मुकदमा दर्ज होने के 15 दिन बाद भी पुलिस की विवेचना एक कदम भी आगे नहीं बढ़ सकी है। दोनों का पता लगाना तो दूर उनके बैंक खाता खोलने के लिए पहचान करने वालों को पुलिस नहीं खोज पाई है।
कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय मुफ्तीगंज में दूसरे के शैक्षिक प्रमाण पत्रंों पर नौकरी करने वाली पूर्णकालिक शिक्षिका प्रीति यादव के खिलाफ नगर कोतवाली पुलिस ने 13 जून को और राजकीय माध्यमिक विद्यालय डिहिया में फर्जी दस्तावेज के सहारे नौकरी करने वाली दीप्ति के खिलाफ पुलिस ने 18 जून को केस दर्ज किया है। मामले की विवेचना उप निरीक्षक गोविंद देव को सौंपी गई है। मुकदमा दर्ज होने के एक पखवारे बाद भी पुलिस इन दोनों फर्जी शिक्षिकाओं का पता नहीं लगा सकी। हालांकि इसी मामले में एसटीएफ की जांच में दोनों शिक्षिकाओं का मैनपुरी का स्थाई पता भी फर्जी निकल चुका है। कोतवाली प्रभारी पवन कुमार उपाध्याय का कहना है कि फर्जी शिक्षिकाओं के मामले की विवेचना कर रहे उप निरीक्षक ट्रेनिंग पर गए हैं। एक सप्ताह बाद उनके लौटने पर विवेचना में प्रगति होगी।